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नेतृत्व की शैली व स्वरूप || Leadership style and nature

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किसी भी उपक्रम या शैक्षिक संस्था की सफलता और असफलता का मुख्य कारण उसके नेतृत्व के स्वरूप या शैली से है।अतः कोई नेतृत्व चाहे वह प्रबंधक हो या व्यवस्थापक किस परिस्थिति में किस शैली का प्रयोग करें जिससे उसे उस संस्था या उपक्रम में सफलता प्राप्त कर सके।अतः शैक्षिक संस्था के उचित संचालन के लिए विभिन्न दशाओं में विभिन्न शैलियों की आवश्यकता होती है। The main reason for the success and failure of any enterprise or educational institution is due to the nature or style of its leadership.Therefore, any leadership, whether it is a manager or administrator, should use which style in which situation so that He can get success in that institution or undertaking.Therefore, for the proper functioning of the educational institution, different styles are required in different conditions. नेतृत्व की शैलियां या स्वरूप निम्न हैं (The following are the styles or forms of leadership)- अभिप्रेरणात्मक स्वरूप व शैली- यह शैली प्रचलित एवं महत्वपूर्ण है। यह शैली अनुयायियों को विभिन्न प्रकार की प्रेरणाएं देकर उनसे काम लेने की विधि का उल्लेख करता है। इस तरह की प्रेरणाएंँ ऋणात्मक और धनात्मक दोनों तरह की होती हैं। यहांँ धनात्मक अभिप्रेरणा से तात्पर्य ठीक आर्थिक तथा अनार्थिक प्रेरणाँए अनुयायियों को देना जिससे वे कार्य को संपन्न कर सकें। त्रणात्मक अभिप्रेरणाओं की विधि में नेता कर्मचारियों को डरा- धमकाकर या कार्य से हटाने, वेतन में कमी आदि की धमकी देकर अभी प्रेरित करता है। Inspirational form and style-This style is popular and important.This style refers to the method of employing the followers by giving them different types of inspirations.Such motivations are both negative and positive. Here, positive motivation means giving the right economic and non-economic motivations to the followers so that they can complete the work.In the method of negative motivation, the leader motivates the employees now by intimidating or threatening to be fired, reduction in salary, etc. शक्ति स्वरूप व शैली नेतृत्व का दूसरा एवं बहु प्रचलित स्वरुप 'शक्ति 'शैली को माना गया है। इसके अंतर्गत नेतृत्व की निम्न तीन स्वरूप हैं।प्रथम,निरंकुश स्वरूप नाम से ही प्रतीत होता है कि इस स्वरूप में नेता सभी अधिकार अपने पास केंद्रित रखता है एवं सारे फैसले स्वयं ही लेता है एवं निर्णय की क्रियान्विति के लिए अनुयायियों को आदेश देता है। अनुयायियों का कार्य केवल यह है कि वह समस्त आदेशों की अनुपालना करें।द्वितीय,प्रजातंत्रीय स्वरूप यह निरंकुश स्वरूप से बिल्कुल विपरीत है।यह स्वरूप नेतृत्व का आधुनिक तथा सर्वमान्य स्वरूप है। इसमें नेता अपने अधिकारों का विकेंद्रीकरण करता है। नीतियों को सभी अनुयायियों से विचार- विमर्श करने के पश्चात ही उसकी सहमति से निर्माण करता है।इसके बदले में नेता उनकी आवश्यकताओं तथा सुविधाओं का पूरी तरह से ध्यान रखते हैं। यह स्वरूप ज्यादा से ज्यादा लोकप्रिय भी होता जा रहा है,क्योंकि यह प्रजातंत्र की भावना से ओतप्रोत है। नेता समूह के सदस्यों पर आश्रित रहता है, इसे इस स्वरूप को समूह- केंद्रित भी कहा गया है। तृतीय,निर्बाध स्वरूप नेतृत्व के स्वरूप का तीसरा हिस्सा है। इसके अंतर्गत अनुयायियों को उनके स्वयं के भरोसे छोड़ दिया जाता है।वे स्वयं ही लक्ष्य निर्धारित करते हैं एवं उससे संबंधित निर्णय भी लेते हैं। अन्य शब्दों में यह कह सकते हैं कि नेता केवल मध्यस्थ तथा समन्वयक के कार्य करता है। इस प्रकार के नेतृत्व के स्वरूप का उपयोग तभी होना चाहिए, जब अनुयायी योग्य् तथा अनुभवी हों। इस स्वरूप को व्यक्ति- केंद्रित भी कहते हैं, क्योंकि यह स्वरूप व शैली व्यक्ति पर ही निर्भर करता है। Shakti Form and Style-The second and most popular form of leadership is considered to be the 'Shakti' style.Under this there are the following three forms of leadership.First, autocratic form.As the name suggests, in this form the leader concentrates all the authority with himself and takes all the decisions himself and is responsible for the implementation of the decision.Commands the followers.The only task of the followers is to obey all the orders.Second, democratic formThis is the exact opposite of the autocratic form.This form is the modern and universally accepted form of leadership.In this the leader decentralizes his powers.The policies are formulated only after consultation with all the followers with their consent.In return, the leaders take full care of their needs and facilities.This form is also becoming more and more popular, because it is imbued with the spirit of democracy.The leader is dependent on the members of the group, this form is also called group-centred.The third, uninterrupted pattern is the third part of the leadership pattern.Under this, the followers are left to their own self. They set their own goals and also take decisions related to them.In other words, it can be said that the leader performs the functions of only mediator and coordinator. This type of leadership pattern should be used only when the followers are qualified and experienced.This form is also called person-centered, because this form and style depends on the person. पर्यवेक्षीकीय स्वरूप व शैली इस स्वरुप के अंतर्गत नेता अपने सामने विशेष उद्देश्य अथवा लक्ष्य रखकर नेतृत्व करता है। यदि नेता कर्मचारी की ओर अधिक महत्व देता है तो यह स्वरूप कर्मचारी प्रधान कहलाता है। इसके भी दो निम्न स्वरूप होते हैं।कर्मचारी प्रधान स्वरूप इस स्वरुप के अंतर्गत नेता अपने अनुयायियों की कार्य दशाएं सुविधाएं तथा कार्य के वातावरण को उचित रूप से सुधारने आदि को अधिक महत्व देते हैं।इससे उसकी और अनुयायियों का झुकाव हो जाता है और वह लोकप्रिय बन जाता है। नेता कर्मचारियों के लिए स्वस्थ्य तथा अनुकूल वातावरण तैयार करने हेतु सदैव तत्पर रहता है। वह मानवीय भावनाओं को ग्रहण कर उनकी समस्याओं को समझता है तथा हल करता है। शक्ति उत्पादन प्रधान स्वरूप यह स्वरूप उपक्रम अथवा संस्था के हित की नजरिए से बहुत ही अच्छा स्वरूप है, किंतु कर्मचारियों के दृष्टिकोण से उचित नहीं है। यह स्वरूप उत्पादन अभीमुखी होता है।अतः कर्मचारियों के मानवीय दृष्टिकोण को यह ध्यान में नहीं रखता। प्रायः नेता उत्पादन वृद्धि पर ही ध्यान देता है और उसके लिए कर्मचारियों कोनिरंतर कार्य करने हेतु प्रेरित करने तथा नई नई तकनीकी अपनाने पर जोर देता है। Supervisory Pattern and Style-Under this pattern the leader leads with a specific objective or goal in front of him.If the leader gives more importance to the employee then this form is called employee-oriented.It also has two following forms.Employee-dominated form Under this form, the leader gives more importance to the working conditions of his followers, facilities and improving the work environment properly etc.This leads to his inclination of more followers and he becomes popular.The leader is always ready to create a healthy and conducive environment for the employees.He understands and solves their problems by accepting human emotions.Production-oriented formThis form is a very good form from the point of view of the interest of the enterprise or organization, but it is not appropriate from the point of view of the employees.This form is production oriented.Therefore, it does not take into account the human attitude of the employees.Often the leader focuses on increasing the production and for that, emphasizes on motivating the employees to work continuously and adopting new technology.

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
edudurga.com

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