s

शिक्षा जगत में 'गुरु' की महत्ता || Importance of 'Guru' in the world of education

   2087   Copy    Share

भारतीय परिप्रेक्ष्य में गुरु- भारतीय परिप्रेक्ष्य में अध्यापक को गुरु से संबोधित करते आ रहे हैं।आज के समय में भी सम्मान एवं श्रद्धा भाव से 'गुरु जी'कहते हैं। 'शिक्षक' शब्द का उपयोग पश्चिमी देशों की बहुत बड़ी देन है।शिक्षक का कार्य शिक्षण करना होता है।इसलिए शिक्षण कार्य को एक व्यवसाय (वृत्ति)कहते हैं।शिक्षक का उत्तरदायित्व पाठ्यक्रम को पूर्ण करना होता है।यदि गृह कार्य दिए गए हैं तो उनकी जांँच करना तथा अवलोकन करके सुझाव देना या त्रुटि सुधार करना होता है।सत्र के अंत में परीक्षाओं का संपादन कराना है तथा उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन करने तक सीमित है,जबकि गुरु की भूमिका तथा उत्तरदायित्व असीमित होता है।गुरु की भूमिका को एक व्यवसाय अथवा वृत्ति (Profession) की संज्ञा नहीं दी जा सकती है।इस हेतु गुरु का अर्थ एवं उसकी भूमिका का पूर्ण विवेचन किया गया है।अध्यापक प्रशिक्षण संबंधित साहित्य में पश्चिमी देशों की विचारधारा को प्रधानता दी जाती है जबकि भारतीय साहित्य में गुरु,शिष्य एवं ज्ञान का विशद रूप से विवेचन किया गया है।

Guru in Indian Perspective- In Indian perspective, teacher has been addressed by Guru.it is said.The use of the word 'teacher' is a great contribution of Western countries. The job of a teacher is to teach.That's why teaching is called a profession.The responsibility of the teacher is to complete the syllabus.If homework is given, it is to be checked and observed and suggested or corrected.At the end of the session, the examinations are to be edited and the evaluation of answer sheets is limited, while the role and responsibilities of the teacher Unlimited.The role of Guru cannot be termed as a profession or profession. For this the meaning of Guru and its role have been fully discussed.In the literature related to teacher training, western countries Ideology is given primacy, whereas in Indian literature, Guru, disciple and knowledge have been discussed extensively.

गुरु शब्द का अर्थ- भारतवर्ष की प्राचीनता,दार्शनिकता तथा आध्यात्मिकता को अखिल विश्व के समृद्ध देश भी बिना संकोच के स्वीकार करते हैं।इस देश की संस्कृत भाषा को समस्त भाषाओं की जिस सभ्यता एवं संस्कृति का उज्जवलतम रूप विश्व के सामने प्रकट हुआ,वह भी इस देश की अनुपम निधि है।अन्य देशों में आज भी भारतवर्ष की छवि आध्यात्मिक गुरु के रूप में स्वीकारते हैं।भारतीय संस्कृति ने 'गुरु' की महत्ता तथा आवश्यकता के संबंध में जितना वर्णन किया गया है उतना दूसरे किसी देश के साहित्य अथवा संस्कृति में नहीं मिलता है।हिंदी-साहित्य का संतकाल भारतीय सभ्यता,संस्कृति,ज्ञान,भक्ति आदि की दृष्टि से 'स्वर्ण युग' की संज्ञा दी गई है।इस काल में गुरु-महिमा,गुरु-भक्ति तथा गुरु-गौरव इन सभी के प्रति सर्वस्व अर्पित करने का अमूल्य उपदेश दिया गया है।

The meaning of the word Guru- India's antiquity, philosophy and spirituality are accepted by the rich countries of the whole world without any hesitation.The civilization and culture of all languages, the brightest form of which has appeared in front of the world, is also the unique treasure of this country.What has been described in relation to the importance and need of 'Guru' is not found in the literature or culture of any other country.The term 'Golden Age' has been given.

गुरु शब्द का व्युत्पत्तिपरक अर्थ- गुरु शब्द गु तथा रू के मिलान करने से बना है। 'गु' का अर्थ अंधकार एवं 'रु' का अर्थ- 'रोकने वाला' होता है।अंधकार को रोकने अर्थात् दूर करने से ही गुरु शब्द का निर्माण हुआ है।

Etymological meaning of the word Guru- The word Guru is formed by the combination of Gu and Ru. 'Gu' means darkness and 'ru' means- 'stopper'.

'अद्वयतारकोपनिषद्' में गुरु शब्द के अर्थ को अधिक स्पष्ट करने हेतु अन्यत्र इस प्रकार कहा गया है- "वेदादि से संपन्न आचार्य, विष्णु भक्त मत्सरताहित,योगात्मा,पवित्र, परमात्मा में विशिष्ट रुप से लीन इन लक्षणों से युक्त मनुष्य को ही गुरु की संज्ञा दी जाती है।अर्थात इन्हें ही गुरु कहा जाता है।गुरु ही परम ब्रह्मा है, परमगति,पराविद्या तथा परायण योग्य है।गुरु ही पराकाष्ठा है,इस प्रकार की विशेषताओं वाला महानतम मनुष्य ही गुरु हो सकता है।वस्तुतः उपदेश देने वाला होने के कारण गुरु को सर्वश्रेष्ठ भी कहा जाता है। गुरु के संबंध में अन्यत्र ऐसा भी कहा गया है- 'गुरु' शब्द का उच्चारण करने मात्र से संसार की विभिन्न समस्याओं से हमें छुटकारा मिल सकता है,समस्त जन्मों के पाप तुरंत नष्ट हो जाते हैं एवं सभी पुरुषार्थ सिद्ध होने की पूर्ण संभावना बनी रहती है।

In 'Advyatarakopanishad', it is said elsewhere to make the meaning of the word Guru more clear- "Acharya endowed with Vedadi, Vishnu devotee with devotion, Yogatma, Holy, Specially in Paramatma. Only a person possessing these qualities is called a guru.That is, he is called guru.Guru is the supreme Brahma, is capable of supreme speed, transcendence and parayan. Guru is perception Only the greatest man with such characteristics can be a guru.In fact, being a preacher, a guru is also called the best. It has also been said elsewhere in relation to the guru - by simply uttering the word 'Guru', the world's various worlds We can get rid of problems, sins of all births are destroyed immediately and all efforts there is full possibility of being proved.

गुरु की आवश्यकता-मानव जीवन का कोई भी क्षेत्र हो, उसमें स्वामित्व प्राप्त करने हेतु किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करनी पड़ती है जो संपूर्ण ज्ञान से परिपूर्ण हो।अर्थात् यह पूर्ण ज्ञानी केवल गुरु ही होता है।गुरु ही साधारण मनुष्यों को अज्ञानता व अंधकार से प्रकाश की तरफ ले चलता है। जिस प्रकार प्रकाश के बिना अंधकार दूर नहीं होता,नाविक के बिना नाव नदी को पार नहीं कर सकती,ठीक उसी प्रकार गुरु के बिना भी व्यक्ति को ज्ञान का प्रकाश प्राप्त नहीं हो पाता है।संसार में जन्म लेकर मनुष्य अगणित चक्रों में पूरी तरह फंँस जाता है।व्यक्ति को मोह, माया और सांसारिक लोभ परेशान करते हैं,विद्या-अविद्या, ज्ञान-अज्ञान,तथा उचित-अनुचित के अंतर को वह ठीक से नहीं जान पाता है।संसार रूपी सागर में मनुष्य की जीवन नौका कभी-कभी डगमगाने लगती है।इस तरह की दीन दशा में सदमार्ग बताने हेतु भ्रमित व्यक्ति को गुरु की महती आवश्यकता होती है।मनुष्य की अनेकानेक समस्याओं को सुलझाने का कार्य केवल गुरु की कृपा से ही संभव होता है।संसार चक्र के दुख-सुख रूपी गोरख धंधों में बुरी तरह फँसा हुआ व्यक्ति असंतुष्ट होकर छठपटाता है।इन समस्त दुख जाल में पड़ा व्यक्ति ऐसे महान व्यक्ति या ऐसी अलौकिक शक्ति की ओर ध्यान लगाता है,जो उसे सांसारिक दुखों से छुटकारा दिला सके।यह अलौकिक शक्ति एवं दिव्य ज्योति से परिपूर्ण व्यक्ति ही गुरु होता है,जिसका क्षणिक संपर्क तथा अमृतवाणी,दुखी तथा असंतुष्ट व्यक्ति को सुख,शांति तथा संतुष्टि प्रदान करती है।इस बात में किसी भी प्रकार का संदेह नहीं कि व्यक्ति की जिज्ञासा वृत्ति को शांत करने हेतु परम ज्ञानी गुरु की अति आवश्यकता होती है।

Need a Guru-In any area of ​​human life, one has to find someone who is full of complete knowledge to get mastery in it.That is, only a Guru is this perfect Gnani.Guru alone takes ordinary people from ignorance and darkness to light. Just as darkness is not dispelled without light, without a sailor a boat cannot cross a river, in the same way a person cannot get the light of knowledge without a guru. By taking birth in the world, a man countless is completely entangled in the chakras.The person is troubled by attachment, illusion and worldly greed, he is not able to know the difference between knowledge-avidya, knowledge-ignorance, and right and wrong.Man in the ocean of the world Sometimes the life boat starts to wobble. In this kind of poor condition, a confused person needs a great Guru to tell the path.It is possible.A person who is full of supernatural power and divine light is a guru, whose momentary contact and nectar give happiness, peace and saints to the sad and dissatisfied person.Provides happiness.There is no doubt in this that to pacify the curiosity of a person, the supreme knowledgeable Guru is very much needed.

शिक्षा जगत में द्विमुखी शिक्षा के अंतर्गत शिक्षक और शिक्षार्थी को ज्यादा महत्व दिया जाता है परंतु शिक्षार्थी तो शिक्षक 'गुरु' के अभाव में अज्ञानी रह जाएंगे तथा शिक्षक की अनुपस्थिति में संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था हास्यास्पद तथा अधूरी ही रह जाएगी।इसी प्रकार आध्यात्म,दर्शन,जंत्र,मंत्र,शस्त्र,शास्त्र,धर्म तथा अनेक भौतिक विद्याओं के क्षेत्र में गुरु की खोज का प्रश्न भी अत्यधिक गंभीर होता है।महानतम तथा परमज्ञानी गुरु, ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में पृथ्वी पर अवतरित होते हैं।इस प्रकार के गुरुओं की आत्मा सांसारिक जाल में ग्रस्त होते हुए भी ईश्वर की याद में तल्लीन रहती है।इस तरह अलिप्त तथा अनासक्त गुरुओं की खोज करना आसान कार्य नहीं है।फिर भी सच्चा जिज्ञासु,लगनशील व्यक्ति आकाश-पाताल छानकर एक दिन अभीष्ट गुरु को ढूंढ ही लेता है। गुरु की तलाश में व्यक्ति की जिज्ञासा,उत्सुकता परम साधन साबित होते हैं।यह निर्विवाद है कि जो ज्ञानी गुरु की खोज नहीं कर पाएगा,जो गहराई में उतरने से डरेगा,वह अपने जीवन के लक्ष्य में भी सफल नहीं हो पाएगा।इस संबंध में महात्मा कबीर दास जी की स्पष्ट उक्ति अत्यधिक सार्थक है।प्रत्येक धर्म तथा परमात्मा में गुरु प्राप्ति हेतु गहरी खोज की जरूरत पर ध्यान दिया गया है। ईशा में न्यूटेस्टामेंट में पर्वत पर उपदेश देते हुए गहरी खोज की ओर स्पष्ट संकेत करते हुए उन्होंने कहा है-"सच्चे दिल से मांँगो, मिलेगा,सच्चे भाव से ढूंढो, पा जाओगे,सत्य पथ पर आचरण करते हुए उसका द्वार खटखटाओ,अवश्य ही खुलेगा।"

In the world of education under two-sided education, more importance is given to the teacher and the learner, but the learner will remain ignorant in the absence of the teacher 'Guru' and the teacher In the absence of the entire education system will remain ridiculous and incomplete.Similarly, the question of search of Guru in the field of spirituality, philosophy, mantra, mantra, weapon, scripture, religion and many other physical disciplines is also very serious.He descends on earth as the representative of God.The soul of such gurus remains engrossed in the remembrance of God even though they are entangled in the worldly web.Thus it is not an easy task to find detached and unattached gurus. Still true An inquisitive, passionate person, after scouring the sky and underworld, one day finds the desired guru.A person's curiosity, curiosity prove to be the ultimate means in search of a Guru.It is undeniable that the knowledgeable who will not be able to search for the Guru, who is afraid to delve deep, will not be able to succeed in his life's goal.Mahatma Kabir Das ji's clear statement is very meaningful.In every religion and God, attention has been given to the need of deep search for attainment of Guru.In the New Testament in the New Testament in Isha, while giving a clear indication of a deeper search, he has said - "Ask with a sincere heart, you will get it, seek with a true heart, you will get it, by following the path of truth. Knock on its door, it will surely open."

इस प्रकार गुरु ही जीवन साधना की सफलता हेतु सर्वप्रथम सोपान है, गुरु ही अपने सदाआचरण, उपदेश तथा व्यवहार के साधक एवं शिष्य का उचित मार्ग प्रशस्त करता है।

Thus Guru is the first step for the success of life sadhna, Guru is the one who paves the right path for the seeker and disciple of his good conduct, preaching and behavior.

गुरु शब्द के विविध आशय (Various meanings of the word Guru)-

जीवन क्षेत्र में उचित मार्गदर्शन करने वाला गुरु ही होता है।अपने से पूर्व जिसने ज्ञान प्राप्त किया है तथा जो जीवन साधना की बाधाओं को आसानी से पार कर चुका है,वही गुरु कहलाता है।शास्त्रों में 10 श्रेणी के व्यक्तियों को गुरु कहा गया है-उपाध्याय,माता-पिता,बड़ा भाई, राजा,मामा, श्वसुर,नाना,दादा,चाचा,ब्राह्माण ये 10 गुरु कहे गए हैं किंतु इन सभी में आचार्य श्रेणी के गुरु की महत्ता विशिष्ट रूप से प्रतिपादित की गई है। "आचार्य श्रेष्ठो गुरुणाम्" अर्थात गुरु में आचार्य ही श्रेष्ठ है वायुपुराण में आचार्य की परिभाषा करते हुए लिखा गया है-"जो शास्त्रों के उद्देश्यों को जाने, स्वयं सदाचारी हो और जनता को सदाचार में लगावे उसे आचार्य के नाम से जाना जाता है।ब्रह्मणड पर्व में आचार्य का लक्ष्य बताते हुए कहा है कि- "स्वयं श्रेष्ठ आचरण करे और दूसरों को भी वैसी ही प्रेरणा दे,शास्त्र के मर्म को जाने,उसे आचार्य कहते हैं।"

Guru is the one who gives proper guidance in the field of life.One who has attained knowledge before himself and who has easily overcome the obstacles of life sadhna is called Guru.In the scriptures, 10 categories of persons have been called gurus - Upadhyay, parents, elder brother, king, maternal uncle, father-in-law, maternal grandfather, grandfather, uncle, brahmin These 10 are called gurus but all these The importance of Acharya class guru has been specially propounded in this. "Acharya Shreshto Gurunam" i.e. Acharya is the best among the Gurus, in Vayu Purana, it has been written while defining Acharya - "He who knows the objectives of the scriptures, is himself virtuous and engages the public in virtue, is known as Acharya. Brahmanad Describing the goal of Acharya in the festival, it has been said that- "Be yourself the best and give the same inspiration to others, knowing the essence of the scriptures, he is called Acharya."

वर्तमान युग में इस प्रकार के गुणों से युक्त आचार्यों की संख्या अत्यल्प है।भर्तृहरि का कथन है कि- "जिनका मन, वचन और काया प्रेम रूपी अमृत से भरे हैं,अपने उपकारों की बाढ़ से जो तीनों लोगों को निमग्न करते हैं, दूसरों के छोटे गुणों को भी जीतते हैं। वेदाध्ययन करने के बाद ही आचार्य अपने शिष्यों को शिक्षा प्रदान करता है। भिक्षु नागसेन के शब्दों में- "आचार्य अपने विषय के प्रति पूर्ण सजग रहता है।अपना कर्तव्य समझकर पढ़ाता है।सोने और विश्राम के प्रति सजग रहता है,शिष्य की सीखने की योग्यता को जानता है।वह उत्साहित करता है।संगीत आदि के विषय में ज्ञान देना आदि विशेषताओं को वर्णित किया है।" ऋग्वेद में गुरु को 'वाचस' कहा गया है जो गूढ़ ज्ञान का ज्ञाता है किंतु अथर्ववेद में गुरु को 'आचार्य' ही कहा जाता है वेदों में आचार्य यम, वरुण, सूर्य तथा चंद्रमा के लिए प्रयोग किया गया है।

In the present era, the number of Acharyas with such qualities is very less.He is filled with the flood of his favors, which submerges the three people, conquers even the small qualities of others. Only after studying the Vedas, the Acharya imparts education to his disciples. In the words of bhikshu Nagasen-"Acharya is fully aware of his subject.He teaches as his duty. He is aware of sleep and rest, knows the ability of the student to learn.He encourages.Giving knowledge about music etc. etc.The characteristics have been described." In Rigveda, the Guru is called 'Vachas' who is the knower of esoteric knowledge, but in Atharvaveda, the Guru is called 'Acharya'. In the Vedas Acharya Yama, Varuna, Surya and has been used for the moon.

आचार्य के अलावा गुरु को उपाध्याय नाम से भी अभिहीत किया गया है।उपाध्याय का अर्थ है- समीप में बैठकर जिससे विद्या प्राप्त की जाये वह उपाध्याय कहलाता है। मनुस्मृति में कहा गया है- " उपाध्याय तो सभी हैं। सबके पास बैठकर ही शिक्षा ग्रहण की जाती है।ज्ञान मार्ग का उपदेश देने वाला गुरु ही श्रेष्ठ है।

Apart from Acharya, the Guru is also referred to by the name Upadhyaya.In Manusmriti it is said- "Upadhyaya is all there. Education is received by sitting near everyone.The Guru who preaches the path of knowledge is the best."

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
edudurga.com

Comments

POST YOUR COMMENT

Recent Posts

उचित मूल्य पर पुस्तक-कापियाँ, यूनिफॉर्म, एवं अन्य सामग्रियों हेतु सत्र 2024-25 में पुस्तक मेले का आयोजन हो सकता है।

1st अप्रैल 2024 को विद्यालयों में की जाने वाली गतिविधियाँ | New session school activities.

Solved Model Question Paper | ब्लूप्रिंट आधारित अभ्यास मॉडल प्रश्न पत्र कक्षा 8 विषय- सामाजिक विज्ञान (Social Science) | वार्षिक परीक्षा 2024 की तैयारी

Subcribe