दुःख, दर्द, कष्ट, पीड़ा, शोक, व्यथा, वेदना, क्षोभ, संताप, क्लेश, खेद, विषाद आदि शब्द लगभग समानार्थक शब्द प्रतीत होते हैं। किन्तु इनमें सूक्ष्म अंतर भी देखने को मिलता है। नीचे इनके अर्थ एवं वाक्यों में प्रयोग को देखें।
दुःख - प्रतिकूल तथा हानिकारक बातों के कारण उत्पन्न मानसिक अनुभूति दुःख कहते हैं। किसी गतिविधि या क्रियाकलाप के कारण नुकसान होने पर दुःख होना जोकि तन और मन से संबंधित हो सकता है।
उदाहरण - ओलावृष्टि के कारण फसलें नष्ट होने पर किसानों को अपार दुख हो रहा है।
दर्द - पीड़ा का ही पर्याय दर्द होता है।
उदाहरण - हड्डी टूट जाने के कारण उसे बहुत दर्द सहन करना पड़ रहा है।
कष्ट - प्रतिकूल तथा कठिन परिस्थितियों के कारण शारीरिक एवं मानसिक थकावट को कष्ट कहते हैं। अभाव या असमर्थता के कारण मानसिक और शारीरिक कष्ट होता है।
उदाहरण - पर्याप्त कपड़ों के अभाव में उसे ठंड में बहुत कष्ट होता है।
पीड़ा - अत्यधिक श्रम से होने वाले कष्ट को पीड़ा कहते हैं, यह भी कष्ट की तरह शारीरिक- मानसिक होती है। रोग-घोट आदि के कारण भी शारीरिक पीड़ा होती है।
उदाहरण - बिच्छू के काटने पर बहुत पीड़ा होती है।
शोक - किसी प्रिय व्यक्ति के अनिष्ट होने पर होने मन में उठने वाले भाव को शोक कहा जाता है। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति की मृत्यु या किसी गहन क्षति के फलस्वरुप उत्पन्न दुःख ही शोक कहलाता है।
उदाहरण - उसे इस बात का शोक है कि उसका मित्र बीमारी से ठीक नहीं हो पा रहा है।
व्यथा - किसी आघात के कारण मानसिक अथवा शारीरिक कष्ट या पीड़ा व्यथा के अंतर्गत आती है। वेदना का हल्का रुप व्यथा है। इसमें रह-रह कर मन में दुःख उत्पन्न होता है।
उदाहरण - पुत्र के दुर्व्यवहार की व्यथा दूसरों से कहना बड़ा कष्टकारी होता है।
वेदना - मानसिक पीड़ा के उग्र तथा अपेक्षाकृत स्थायी रुप को वेदना कहा जाता है।
उदाहरण - नशे की लत से बर्बादी के कारण उसकी पत्नी अपनी वेदना दूसरों को भी नहीं बता सकती।
क्षोभ - सफलता न मिलने या असामाजिक स्थिति पर दुखी होना।
उदाहरण - इतने अच्छे कार्यों के बावजूद पुरस्कार के लिए चयन न होने का उसे बड़ा क्षोभ है।
संताप - व्यथा में कुछ स्थायित्व आ जाता है उसे संताप कहते हैं।
उदाहरण - बेटे का घर छोड़कर चले जाने से माता पिता संताप ग्रस्त हो चुके हैं।
क्लेश - यह मानसिक अप्रिय भावों या अवस्थाओं का सूचक है।
उदाहरण - भाई के प्रति इतनी दुर्भावना कितना क्लेश है।
खेद - किसी भूल या त्रुटि के कारण जो क्षणिक दुःखानुभूति होती है उसे खेद कहा जाता है। किसी गलती पर दुःखी होना। मन में दुःख के ऐसे भाव जो भूलवश किये गए कार्यों के कारण पैदा हुए हों।
उदाहरण - धोखे से पुस्तक का पन्ना फटने से मोहन ने खेद प्रकट किया।
(मन से सम्बन्धित अपनी भूल पर)
विषाद - अतिशय दुःखी होने के कारण किंकर्तव्यविमूढ होना विषाद की स्थिति को दर्शाता है। जब इच्छायें अधूरी रह जाती हैं तब मन में जो निराशा की गहन भावना उत्पन्न होती है, उसे विषाद कहते हैं।
उदाहरण - नौकरी न मिल पाने के कारण वह विषाद ग्रस्त हो गया है।
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R. F. Tembhre
(Teacher)
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