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तापीय प्रदूषण - कारण, स्त्रोत, प्रभाव, सुझाव या उपाय || Thermal pollution, causes or sources, effects, suggestions or remedies

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तापीय प्रदूषण– इस प्रदूषण से अभिप्राय है कि जल के तापमान में इतनी वृद्धि हो जाना कि वह जल जीवों एवं अन्य के लिए हानिकारक सिद्ध होता हो।यही तापीय प्रदूषण है।

नाभिकीय तथा तापीय ऊर्जा के केंद्रों की मशीनों को ठंडा करने के पश्चात गर्म जल को पुनः जलीय तंत्र में डाल देने से जलीय तंत्र का तापमान अत्यंत बढ़ जाता है इस प्रक्रिया को ही तापीय प्रदूषण कहा जाता है।

दूसरे शब्दों में, ताप के प्रभाव से जलीय वायुमंडलीय पारिस्थितिकीय-तंत्र में प्रभावी बदलाव तापीय प्रदूषण के अंतर्गत आता है।

Thermal Pollution– This pollution refers to the increase in the temperature of water so much that it proves harmful to water organisms and others. There is pollution.

After cooling the machines of nuclear and thermal energy centers, the temperature of the aqueous system increases greatly due to the hot water being put back into the aquatic system.The process itself is called thermal pollution.

In other words, thermal pollution is the dominant change in aquatic atmospheric ecosystems due to the effects of heat.

तापीय प्रदूषण के कारण/स्त्रोत–(Causes/sources of thermal pollution-)

तापीय प्रदूषण के निम्नांकित कारण हो सकते हैं–
(1).समुद्रों में किया जाने वाला परमाणु परीक्षण तापीय प्रदूषण का एक अति महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। परमाणु विस्फोट से विशाल क्षेत्र में तापमान में वृद्धि हो जाती है व मछलियों और अन्य जीवो का बड़ी मात्रा में विनाश हो जाता है।
(2).जब अंतरिक्ष यानों को महासागरीय जल में उतारा जाता है तब ऐसी स्थिति में भी तापमान में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है।
(3).अनेक उद्योगों में शीतलन प्रक्रिया हेतु जल का प्रयोग कर गर्म जल नदी या जलाशयों में बहा देते हैं।इससे विशाल जल क्षेत्र में ताप का अत्यधिक विस्तार होता है,फलस्वरुप मछलियांँ व अन्य जल जीव एवं जलीय वनस्पति का भी विनाश हो जाता है।
(4).प्रदूषित जल की सतह पर उपस्थित पदार्थों द्वारा अधिकता में ताप का अधिशोषण किया जाता है जिससे तापीय प्रदूषण अत्यंत मात्रा में फैलता है।
(5).प्रशीतक उपकरण, वायुयानों में प्रशीतकों के प्रयोगों से छोड़े गए CFC के कारण तापीय प्रदूषण बढ़ता है।
(6).विलायकों पर आधारित उद्योगों से छोड़े गए कार्बन टेट्राक्लोराइड,निलाईल क्लोरोफॉर्म आदि की वाष्प द्वारा तापीय प्रदूषण होता है।
(7).ग्रीन हाउस गैस,कार्बन डाइ-ऑक्साइड मीथेन, क्लोरोफ्लोरोकार्बन,नाइट्रस ऑक्साइड,आदि की विश्व स्तर पर वायुमंडल में वृद्धि से भी तापीय प्रदूषण फैलता है।
(8).वाहनों की संख्या में विश्व स्तर पर होने वाली बढ़ोतरी के कारण भी तापीय प्रदूषण निरंतर फैलता जाता है।
(9).हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट के जल का उपयोग ऊर्जा उत्पादन हेतु करते हैं।यह जल अन्य की अपेक्षा अत्यधिक गर्म हो जाता है और नदियों में मिलने से तापीय प्रदूषण फैलता है।
(10).कोयला जनित संयत्र से भी यह तापीय प्रदूषण अधिक से अधिक मात्रा में फैलता है।

The following causes of thermal pollution can be –
(1).nuclear testing in oceans is considered a very important cause of thermal pollution.A nuclear explosion increases the temperature in a large area and destroys a large amount of fish and other organisms.
(2).When spacecraft are launched in ocean water, then even in such a situation, there is a huge increase in temperature.
(3).In many industries, using water for the cooling process, hot water is drained into the river or reservoirs.This causes excessive expansion of heat in the vast water area, as a result of which fishes and other water creatures and aquatic vegetation also get destroyed. is.
(4).adsorption is done in excess by the substances present on the surface of the polluted water, due to which thermal pollution spreads to a great extent.
(5).The thermal pollution increases due to the release of CFC from the use of refrigerants in refrigeration equipment, aircrafts.
(6).Thermal pollution is caused by vapors of carbon tetrachloride, nylyl chloroform etc. released from industries based on solvents.
(7).Thermal pollution also spreads due to the increase in the atmosphere globally of greenhouse gas, carbon dioxide, methane, chlorofluorocarbons, nitrous oxide, etc.
(8).Due to the increase in the number of vehicles globally, thermal pollution continues to spread.
(9).Hydroelectric power plant's water is used for energy production.This water becomes very hot compared to others and thermal pollution spreads due to mixing in rivers.
(10).This thermal pollution also spreads in greater quantity from the coal-fired plant.

तापीय प्रदूषण के प्रभाव–(Effects of thermal pollution)

तापीय प्रदूषण के निम्नांकित प्रभाव देखने को मिलते हैं–
(1).जलाशयों के तापमान में वृद्धि से जलतंत्रों को कई तरह की हानि होती है।
(2).पराबैंगनी विकिरणों की अधिकता से कई बिमारियांँ जैसे-कैंसर, त्वचा रोगों में अत्यधिक वृद्धि आदि जन्म लेतीं हैं।
(3).तापीय प्रदूषण से ध्रुवीय प्रदेशों तथा पर्वतों के शिखरों पर जमी बर्फ के पिघलने से समुद्री जल का स्तर ऊंँचा हो जाता है जिससे तटीय क्षेत्रों के डूबने का खतरा बना रहता है।
(4).तापीय प्रदूषण से जल-चक्र में परिवर्तन हो जाता है, जिससे कहीं भीषण सूखा पड़ता है तो कहीं अत्यधिक बाढ़ आ जाती है।
(5).तापीय प्रदूषण से कृषि भूमि में आभाव हो जाता है।
(6).इस प्रदूषण के कारण पर्यावरण में आक्सीजन में भी अभाव देख सकते हैं।
(7).तापीय प्रदूषण से मौसम में बदलाव आ जाता है। मौसम छोटे एवं असंभावित हो जाते हैं।
(8).इस प्रदूषण से ओजोन गैस की रक्षक परत का भी विनाश हो जाता है।

Effects of Thermal pollution

The following effects of thermal pollution are seen–
(1).The increase in the temperature of the reservoirs causes many types of damage to the water systems.
(2).Excess of ultraviolet radiations lead to many diseases like-cancer, excessive increase in skin diseases etc.
(3).The melting of ice on the polar regions and mountain tops due to thermal pollution raises the level of sea water, which poses a risk of drowning coastal areas.
(4).Thermal pollution changes the water cycle, which leads to severe drought and extreme floods.
(5).Thermal pollution causes depletion of agricultural land.
(6).Due to this pollution, there can also be a lack of oxygen in the environment.
(7).Thermal pollution causes a change in the weather.seasons become shorter and unlikely.
(8).This pollution also destroys the protective layer of ozone gas.

तापीय प्रदूषण के नियंत्रण हेतु सुझाव/उपाय–(Suggestions/measures for the control of thermal pollution-)

तापीय प्रदूषण के नियंत्रण हेतु निम्न उपाय किए जाने चाहिए–
(1).उद्योगों से निकलने वाले धुएंँ में ग्रीन हाउस गैसों को बहुत कम मात्रा में छोड़ा जाना चाहिए।
(2).प्रत्येक व्यक्ति को अपना नैतिक कर्तव्य मानकर वृक्षारोपण अधिकाधिक मात्रा में करना चाहिए। जिससे कार्बन डाइऑक्साइड अधिक से अधिक काम में आये व वायुमंडल ठंडा रहे।
(3).चरणबद्ध रूप से ओजोन परत को हानि पहुंँचाने वाले पदार्थों के प्रयोग पर निरंतर प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए।
(4).वाहनों में पूर्ण रूप से अप्रदूषित (शुद्ध) तेल का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है।
(5).विभिन्न उद्योगों द्वारा गर्म औद्योगिक अपशिष्टों को बहुत ही अल्प मात्रा में पानी में छोड़ा जाना चाहिए।

The following measures should be taken to control thermal pollution–
(1).Green house gases should be released in very small quantities in the smoke coming out of the industries.
(2).Every person should do tree plantation as his moral duty.Due to which more and more carbon dioxide can be used and the atmosphere remains cool.
(3).Continuous bans should be imposed on the use of substances that harm the ozone layer in a phased manner.
(4).The use of completely unpolluted (pure) oil in vehicles is extremely important.
(5).The hot industrial effluents should be released into the water in very small quantities by various industries.

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
edudurga.com

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