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भारत में 'हरित क्रांति' से तात्पर्य। (Meaning of 'Green Revolution' in India)

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हरित क्रांति से अभिप्राय, "कृषि की उत्पादन तकनीक को सुधारने एवं कृषि उत्पादन में वृद्धि करने से होता है।" इस प्रकार, हरित क्रांति में मुख्य रूप से दो बातें निहित होती हैं–
i. एक तो, उत्पादन तकनीक में पूर्ण सुधार हो।
ii. दूसरे, कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हो।
उत्पादन तकनीकी में सुधार हल के स्थान पर ट्रैक्टर से जुताई करने, मानसून पर निर्भर न रहकर ट्यूबवेल से सिंचाई की व्यवस्था करने, एवं उपज को पशुओं के पैरों से अलग न करने थ्रेसर मशीन का उपयोग आदि से होता है। इसके विपरीत, कृषि उत्पादन में वृद्धि अच्छे बीज देने, अच्छी रासायनिक खाद देने व उचित समय पर पानी का प्रबंध करने, आदि से होता है तथा फसलों को किटाणुओं से बचाव से भी होता है।

भारत में हरित क्रांति के शुभारंभ का मुख्य श्रेय स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री को दिया जा सकता है, जिन्होंने 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया, जिनके अनुसार भारत देश को सैनिक दृष्टि से शक्तिशाली बनाने का काम सैनिकों का है, जबकि खाद्यान्नों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का काम पूर्णतः किसानों का होता है।

Green Revolution means, "Improving the production technology of agriculture and increasing agricultural production." Thus, Green Revolution mainly consists of Two things are involved –
i. First, there should be a complete improvement in the production technology.
ii. Secondly, agricultural production should also increase.
Improvement in production technology is done by plowing with tractor instead of plough, arranging irrigation from tube well without relying on monsoon, and use of thresher machine to not separate the produce from the feet of animals etc. On the contrary, agricultural production is increased by giving good seeds, giving good chemical fertilizers and arranging water at the right time, etc. and also by protecting the crops from germs.

The main credit for the launch of Green Revolution in India can be given to Late Prime Minister Shri Lal Bahadur Shastri, who gave the slogan 'Jai Jawan Jai Kisan', According to which the task of making India strong from a military point of view is of the soldiers, while the task of making self-reliant in the field of food grains is entirely the work of the farmers.

हरित क्रांति के मुख्य तत्व

(Main Elements of Green Revolution)

हरित क्रांति के मुख्य तत्व या नवीन कृषि नीति की प्रमुख दशाएंँ निम्नांकित हैं–
(1). उन्नत किस्म के बीजों के प्रयोग में वृद्धि– हरित क्रांति के परिणामस्वरूप अधिक उपज देने वाली किस्मों के बीजों का उपयोग में वृद्धि हुई है, और नवीन किस्मों की खोज की गई है, जैसे– चावल में छोटा बासमती, नयी जया, पदमा, रत्ना, विजय, कृष्णा; गेहूंँ में सोना-कल्याण, पंजाब केसरी, 2329, H.D.2825, सोनालिका,R.R.21 आदि।अभी तक ज्यादा उपज देने वाला कार्यक्रम गेहूंँ, धान, बाजरा, मक्का व ज्वार पर ही लागू किया गया है।किंतु गेहूंँ में सर्वाधिक सफलता प्राप्त हुई है। 1966-67 वर्ष में 19 लाख हेक्टेयर भूमि में ज्यादा उपज देने वाले बीजों का प्रयोग किया गया था, जबकि 2001-2 में 815 लाख हेक्टेयर भूमि में किया गया था।
(2).रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में तेजी से बढ़ौतरी– इस क्राँन्ति के कारण उर्वरकों के उपयोग की मात्रा में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।1960-61 में प्रति हेक्टेयर 1.9 किलोग्राम रासायनिक खाद का उपयोग हुआ करता था, जो आज के समय में बढ़कर 7.1 किलोग्राम हो चुका है।इसी तरह 1960-61 में रासायनिक खादों की कुल खपत 3 लाख टन मानी गई थी, जो 2001-2 में बढ़कर 225 लाख टन हो जाने का अंदाजा लगाया गया है।
(3).लघु सिंचाई योजनाएंँ– हरित क्रांति के तीन अति महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं – पहला है, अच्छे बीज, दूसरा, बीज खाद एवं तीसरा सिंचाई। इनमें भी लघु सिंचाई को विशेष प्रकार का महत्व दिया गया है।आपातकालीन कृषि उत्पादन कार्यक्रम के अधीन लघु सिंचाई की विशेष योजनाएंँ स्वीकृत की गई हैं।परिणामस्वरुप 2001-02 में 475 लाख हेक्टेयर भूमि को लघु सिंचाई योजनाओं के द्वारा सींचा जा चुका है।
(4).आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग– हरित क्रांति में आधुनिक कृषि उपकरण जैसे, ट्रैक्टर, थ्रेसर, बुलडोजर, हार्वेस्टर आदि ने काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।1956 में भारत देश में 21 हजार ट्रैक्टर थे, किंतु आधुनिक समय में इनकी संख्या लगभग छह लाख मानी जाती है।इसी प्रकार शक्ति से चलने वाले पंप सेटों की संख्या 1956 में 1.7 लाख थी, किंतु आज इनकी संख्या भी 66 लाख के आसपास मानी जाती है।सरकार की नीति इन उपकरणों के प्रयोग में मुख्यतः वृद्धि करने की है।
(5).पौध संरक्षण– हरित क्रांति के अंतर्गत पौध संरक्षण का भी अति महत्वपूर्ण योगदान रहा है।इस हेतु भूमि तथा फसलों पर दवा छिड़कने का काम किया जाता है।टिड्डी दल को पूर्णतया नष्ट किया जाता है।

(1).Increase in the use of improved varieties of seeds– Green Revolution has resulted in increased use of seeds of high yielding varieties, and discovery of new varieties, such as- rice In Chota Basmati, Nayi Jaya, Padma, Ratna, Vijay, Krishna; In wheat, Sona-Kalyan, Punjab Kesari, 2329, HD2825, Sonalika, RR21 etc. So far, the high yielding program has been implemented only on wheat, paddy, bajra, maize and jowar. But most success has been achieved in wheat.In the year 1966-67, high yielding seeds were used in 19 lakh hectares of land, while in 2001-2 it was done in 815 lakh hectares of land.
(2).Rapid increase in the use of chemical fertilizers– Due to this revolution there has been a rapid increase in the amount of use of fertilizers.In 1960-61, 1.9 kg of chemical fertilizers per hectare were used. Which has increased to 7.1 kg in today's time.Similarly, the total consumption of chemical fertilizers was estimated to be 3 lakh tonnes in 1960-61, which has been estimated to increase to 225 lakh tonnes in 2001-2.
(3).Minor Irrigation Schemes– Three very important parts of Green Revolution are considered – first is good seeds, Second, seed fertilizer and third irrigation. In these too, special importance has been given to minor irrigation. Special schemes of minor irrigation have been approved under the Emergency Agricultural Production Program.As a result, in 2001-02, 475 lakh hectares of land has been irrigated through minor irrigation schemes.
(4).Use of modern agricultural equipment– Modern agricultural equipment such as tractors, threshers, bulldozers, harvesters etc. have contributed significantly to the Green Revolution. In 1956, there were 21 thousand tractors in India, But in modern times, their number is considered to be about six lakhs. Similarly, the number of pump sets operated by power was 1.7 lakhs in 1956, but today their number is also considered to be around 66 lakhs. Government policy in the use of these equipments Mainly to increase.
(5).Plant Protection– Plant protection has also been a very important contribution under the Green Revolution.For this, the work of spraying medicine on the land and crops is done.Locust party is completely destroyed.

हरित क्रांति का प्रभाव

(Effect of Green Revolution)

हरित क्रांति से देश के कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई है।हरित क्रांति के प्रभावों को निम्न बिंदुओं के आधार पर स्पष्टीकरण कर सकते हैं–
(1).अधिक उत्पादन– हरित क्रांति से सबसे पहला प्रभाव यह हुआ है कि कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है विशेष रूप से गेहूंँ ,बाजरा,चावल, मक्का व ज्वार में आशातीत वृद्धि देखी गई है, जिसके परिणामस्वरूप खाद्यान्नों में भारत आत्मनिर्भर सा बन गया है।
(2).परंपरागत स्वरूप में बदलाव– इस क्रांति से खेती के परंपरागत स्वरूप में सकारात्मक परिवर्तन देखा गया है और खेती व्यावसायिक दृष्टि से की जाने लगी है, जबकि प्राचीन समय में सिर्फ पेट भरने हेतु उत्पादन करने की दृष्टि से की जाती थी।
(3).कृषि बचतों में वृद्धि– उन्नत बीज, रासायनिक खाद्यें, उत्तम सिंचाई साधन एवं मशीनों के प्रयोग से उत्पादन बढ़ा है, जिससे किसानों के पास बचतों की मात्रा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसको देश के विकास हेतु काम में ला सकते हैं।इससे औद्योगिक क्षेत्र में भी प्रगति हुई है तथा उत्पादन में भी वृद्धि देखा गया है।
(4).रोजगार के अवसरों में वृद्धि– इस क्रांति से भारत देश में रोजगार के अवसरों में भी काफी वृद्धि देखी गई है।खाद, पानी, यंत्रों आदि के संबंध में लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।मरम्मत उद्योग में भी कुछ व्यक्तियों को रोजगार की सुविधा प्राप्त हुई है।
(5).खाद्यान्नों की आयात में अभाव– हरित क्रांति के परिणाम स्वरुप खाद्यान्नों का आयात 1978 से 1980 तक पूर्णतः ठप्प हो चुका था।किंतु 1979-80 में खाद्यान्नों का उत्पादन कम होने की वजह से 1981, 1982, 1983,एवं 1984 में क्रमशः 6.6,15.8, 40 व 23.7 लाख टन खाद्यान्नों का आयात किया गया था परंतु इसके पश्चात स्थिति इसके विपरीत हो चुकी थी।
(6).विश्वास– हरित क्रांति का सबसे बड़ा एवं महत्वपूर्ण प्रभाव यह हुआ है कि किसान, सरकार एवं जनता सभी में यह विश्वास जागृत हो चुका है कि भारत कृषि पदार्थों के क्षेत्र में पूर्णतःआत्मनिर्भर नहीं हो सकता है, बल्कि जरूरत पड़ने पर निर्यात भी कर सकता है।

Green revolution has seen significant progress in the agricultural sector of the country.The effects of Green Revolution can be explained on the basis of following points–
(1).More production– The first effect from the Green Revolution has been that there has been an increase in agricultural production, especially wheat, millet, rice, maize and jowar have seen an unprecedented increase, as a result of which India has become self-sufficient in food grains. Gone.
(2).Change in the traditional form– Positive change has been seen in the traditional form of farming due to this revolution and farming has started being done commercially, whereas in ancient times it was done only with a view to produce to fill the stomach.
(3).Increase in agricultural savings- Production has increased due to the use of improved seeds, chemical foods, better irrigation tools and machines, due to which there has been a significant progress in the amount of savings with the farmers, which can be used for the development of the country.Due to this progress has also been made in the industrial sector and production has also increased.
(4).Increase in employment opportunities– This revolution has also seen a great increase in employment opportunities in the country of India. People have got employment in relation to manure, water, machines etc. Some people have also got employment in the repair industry. Employment facility has been received.
(5).Lack of import of food grains– As a result of the Green Revolution, the import of food grains had come to a complete halt from 1978 to 1980. But due to low production of food grains in 1979-80, in 1981, 1982, 1983, and 1984 6.6,15.8, 40 and 23.7 lakh tonnes of food grains were imported respectively, but after that the situation was reversed.
(6).Confidence- The biggest and most important effect of the Green Revolution has been that the farmers, government and public have awakened the belief that India cannot be completely self-sufficient in the field of agricultural products, but also exports when needed. can.

हरित क्रांति की समस्याएंँ

(Green Revolution Problem)

हरित क्रांति से कुछ फसलों के उत्पादन में वृद्धि तो हुई है, किंतु फिर भी इसमें कुछ समस्याएंँ या कमियांँ भी देखने को मिली हैं जो कि निम्नानुसार हैं–
(1). प्रभार कुछ फसलों तक ही सीमित– यह क्रांति कुछ फसलों जैसे– गेहूंँ, बाजरा, ज्वार तक ही सीमित होता है, अन्य फसलों पर इसका कोई प्रभाव नहीं देखा गया है।यहांँ तक कि चावल भी इससे बहुत ही कम मात्रा में प्रभावित हुआ है।अन्य व्यापारिक फसलें, जैसे–गन्ना,पटसन, कपास, जूट आदि इससे भी पूरी तरह से अप्रभावित ही देखने को मिली हैं।
(2). असंतुलित विकास– इस क्रांति का क्षेत्र कुछ ही प्रदेशों तक सीमित है,विशेष तौर से उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु।इसमें भी इन प्रदेशों के कुछ ही हिस्सों पर हरित क्रांति का प्रभाव पड़ा है।इस प्रकार हरित क्रांति संपूर्ण देश में नहीं फैल पाई है।इसलिए अर्थशास्त्री इसको सीमित सफलता ही मानते आए हैं।फलतः देश में विकास संतुलित रूप से नहीं हुआ।
(3). पूंँजीवादी कृषि को प्रोत्साहन– हरित क्रांति से लाभ केवल उन किसानों को ही है प्राप्त हुआ है, जिन्होंने पंपिंग सेट, नलकूप, ट्रैक्टर एवं कृषि यंत्रों को लगा लिया है।देश में यह कार्य बड़े किसान ही करने में सक्षम होते हैं।सामान्य किसान इन सुविधाओं से लाभ प्राप्त नहीं कर सकते हैं।साथ ही बड़े कृषकों को ही सरकार एवं सहकारी समिति आदि से सुविधाएंँ प्राप्त हो पाती हैं।परिणामस्वरूप बड़े कृषक ही उचित लाभ उठा रहे हैं और इस तरह पूंँजीवादी कृषि को अधिक प्रोत्साहन प्राप्त हो रहा है।
(4). खेतिहर मजदूरों को कठिनाई– बड़े-बड़े फार्मो में नई तकनीकी प्रयोग की वजह से मानवीय श्रम की आवश्यकता कम पड़ती है जिसके परिणामस्वरुप खेतिहर मजदूरों में बेरोजगारी में वृद्धि हुई है, जिससे उनको कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।
(5). कृषि उत्पादन की वार्षिक दर– हरित क्रांति के फलस्वरूप ऐसी उम्मीद की गई थी कि कृषि उत्पादन की वार्षिक दर में वृद्धि होगी ही किंतु ऐसा नहीं हुआ।1949-50 से 2000-01 के बीच विकास दर का औसत 2.6% ही रहा जो कि अत्यंत कम है।

Green revolution has increased the production of some crops, but still some problems or drawbacks have also been seen in it which are as follows-
(1).Charge limited to few crops– This revolution is limited to few crops like wheat, bajra, jowar, no effect has been seen on other crops.Even rice in very less quantity than this.Other commercial crops, such as sugarcane, jute, cotton, jute etc. have also been completely unaffected.
(2).Unbalanced Development– The scope of this revolution is limited to a few regions, especially Uttar Pradesh, Punjab, Haryana, Maharashtra and Tamil Nadu.In this also the Green Revolution has affected only a few parts of these regions.Thus The Green Revolution has not spread throughout the country.Therefore, economists have considered it as a limited success.As a result, the development in the country was not balanced.
(3).Promotion of capitalist agriculture- The benefit of Green Revolution has been received only by those farmers, who have installed pumping sets, tube wells, tractors and agricultural machines.Only large farmers are able to do this work in the country.Ordinary farmers cannot get benefits from these facilities. Also, only big farmers get facilities from government and cooperative society etc.As a result, only big farmers are getting proper benefits and thus capitalist agriculture gets more incentive. has been.
(4).Difficulty to agricultural laborers– Due to the use of new technology in big farms, the need for human labor is reduced, as a result of which unemployment has increased among the agricultural laborers, due to which they are facing difficulties.
(5).Annual rate of agricultural production– As a result of the Green Revolution, it was expected that there would be an increase in the annual rate of agricultural production, but this did not happen. Between 1949-50 to 2000-01, the average growth rate was only 2.6%. which is very low.

हरित क्रांति की सफलता हेतु सुझाव

(Tips for success of Green Revolution)

हरित क्रांति को सफल बनाने हेतु निम्नलिखित सुझाव बताए जाते हैं–
(1).हरित क्रांति का विस्तार– हरित क्रांति की सफलता हेतु यह सुझाव दिया जाता है कि इसका अधिक से अधिक विकास किया जाए, जिससे कि यह संपूर्ण देश में एक समान रूप से लागू हो पाए।साथ ही नवीन फसलों को इसके अंतर्गत लिया जाना चाहिए, विशेष रूप से दालें। इनके अलावा अन्य फसलें जैसे– कपास, गन्ना, तिलहन एवं जूट आदि को भी इनके अंतर्गत लिया जाना चाहिए।
(2).सिंचाई के साधनों का विकास– हरित क्रांति की सफलता के लिये सिंचाई साधनों का विकास किया जाना आवश्यक है।इस हेतु सरकार दो प्रकार से मदद कर सकती है।प्रथम, छोटे व मध्यम किस्म के किसानों को ऋण प्रदान कर सकती है, जिससे कि वे अपने खेतों में नलकूप एवं पंपिंग सेट लगा पाएँ।द्वितीय, सरकार को स्वयं ही नहरें एवं दूसरे सिंचाई साधनों में वृद्धि करनी चाहिए।
(3).छोटे किसानों को हरित क्रांति के क्षेत्र में लाया जाए– छोटे किसानों को भी हरित क्रांति के क्षेत्र में लाया जाना अनिवार्य होता है, इसके लिए भी निम्न कार्य करने होंगें–
(i).भूमि सुधार कार्यक्रमों को तेजी से लागू किया जाना चाहिए।
(ii).छोटे किसानों को विभिन्न कृषि साधनों को क्रय करने हेतु साख सुविधाएंँ प्रदान की जानी चाहिए।
(iii).उनको कृषि यंत्र किराए पर मिलने की पूर्ण सुविधा होनी चाहिए।
(iv).छोटे किसानों को सहकारी कृषि समितियों में गठित हो जाने हेतु बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
(4).व्यापारिक फसलों को कृषि क्रांति में शामिल करना– अब तक खाद्यान्नों को ही हरित क्रांति में सम्मिलित किया गया है, उसमें भी गेहूंँ का ही अधिक बोलबाला है।अतःयह सुझाव दिया जाता है कि अन्य खाद्यान्नों व व्यापारिक फसलों जैसे– कपास, पटसन, गन्ना, तिलहन, चावल आदि को भी सम्मिलित किया जाना चाहिए।
(5).कृषि वित्त की पूर्ण सुविधा– किसानों को हरित क्रांति से पूर्ण रूप से लाभ उठाने के लिए जरूरी वित्तीय सुविधाएंँ प्रदान करनी चाहिए, जिससे कि कृषक आवश्यक उन्नत बीज, रासायनिक खाद, आधुनिक कृषि उपकरणों को आसानी से क्रय कर पाएं एवं कृषि कार्य को विकास की ओर ले जा सकें।

The following suggestions are given to make Green Revolution successful–
(1).Expansion of Green Revolution– For the success of Green Revolution, it is suggested that maximum development should be done so that it can be implemented uniformly in the whole country. Also new crops are taken under it.Must go, especially pulses.Apart from these, other crops like cotton, sugarcane, oilseeds and jute etc. should also be taken under them.
(2).Development of Irrigation Means– For the success of Green Revolution, development of irrigation means is necessary.For this the government can help in two ways.First, Small and medium variety Can provide loans to farmers, so that they can install tube wells and pumping sets in their fields.Second, the government itself should increase canals and other irrigation sources.
(3).Small farmers should be brought in the field of Green Revolution– It is necessary to bring small farmers also in the field of Green Revolution, for this also the following things will have to be done–
(i).Land reform programs should be implemented expeditiously.
(ii).Credit facilities should be provided to small farmers for purchasing various agricultural inputs.
(iii).They should have full facility to get agricultural machinery on rent.
(iv).Small farmers should be encouraged to be formed into cooperative agricultural societies.
(4).Inclusion of commercial crops in the agricultural revolution– So far only food grains have been included in the green revolution, in that too wheat is the most dominated.Therefore it is suggested that other food grains And commercial crops like cotton, jute, sugarcane, oilseeds, rice etc. should also be included.
(5).Full Facility of Agriculture Finance–The farmers should be provided with the necessary financial facilities to take full advantage of the Green Revolution, so that farmers can get the necessary advanced seeds, chemical fertilizers, modern agricultural equipments. Be able to buy easily and take agriculture work towards development.

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
edudurga.com

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