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10th हिन्दी मॉडल टेस्ट पेपर (हल सहित) परीक्षा वर्ष 20223-24 || Hindi 10th Solved Model Test Paper

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खंड 'क'

1. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए―
अनुशासन की पहली पाठशाला है- परिवार। बच्चा अपने परिवार में जैसा देखता है, वैसा ही वह आचरण करता है। जो माता-पिता अपने बच्चों को अनुशासन में देखना चाहते हैं, वे स्वयं अनुशासन में रहते हैं। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का होना अति आवश्यक है। जो विद्यार्थी आकर्षणों से भरी जिन्दगी को अनुशासित कर लेते हैं, वे सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते चले जाते हैं। अनुशासन के बल पर ही छात्र अपने समय का सही उपयोग कर सकता है। ठीक समय पर उठना, व्यायाम करना, पढ़ाई करना, शयन करना, इन नियमों का पालन कर वह अपने जीवन में अनेक ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न―

(i) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
उत्तर― विद्यार्थी जीवन में अनुशासन

(ii) निम्नलिखित में से 'अनुशासन' में उपसर्ग और मूलशब्द अलग-अलग हैं―
(क) अनु + शासन
(ख) अनुश + आसन
(ग) अन् + उशासन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर― (क) अनु + शासन

(iii) कैसे छात्र सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते चले जाते हैं?
उत्तर― वे विद्यार्थी जो आकर्षणों से भरी जिन्दगी को अनुशासित कर लेते हैं, वे सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते चले जाते हैं।

(iv) 'अनुशासन' का महत्त्व है?
(क) जिन्दगी को अनुशासित कर लेना
(ख) जीवन को अस्त-व्यस्त कर लेना
(ग) सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते जाना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर― (क) जिन्दगी को अनुशासित कर लेना

(v) अनुशासन के पक्ष में बच्चे पर उसके परिवार का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर― परिवार बच्चे के अनुशासन की पहली पाठशाला होती है। बच्चा अपने परिवार में जैसा देखता है, वैसा ही वह आचरण करता है अतः जो माता-पिता अपने बच्चों को अनुशासन में देखना चाहते हैं, उन्हें स्वयं अनुशासन में रहना चाहिए।

2. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए―
हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती,
लहरों से डरकर नैया पार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है।।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।।

(i) उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर― कोशिश का प्रतिफल

(ii) हार किसकी नहीं होती, और नैया पार किसकी नहीं होती कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तर― हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती है और लहरों से डरने वालों की नैया पार किसकी नहीं होती है।

(iii) हमारी रगों में साहस भरता है―
(क) मन का विश्वास
(ख) बुद्धि
(ग) बाहरी लोगों का विश्वास
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर― (क) मन का विश्वास

(iv) 'मन का विश्वास रगों में साहस भरता है।' पंक्ति का आशय बताइए।
उत्तर― उक्त पंक्ति का आशय है कि यदि मन में विश्वास भरा हुआ होता है तो हमारे शरीर के अंग में साहस उभर आता है।

(v) चींटी की मेहनत क्यों बेकार नहीं होती ―
(क) सतत् प्रयत्न करते रहने के कारण
(ख) संगठन के कारण
(ग) दृढ़ विश्वास के कारण
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर― (क) सतत् प्रयत्न करते रहने के कारण

खण्ड 'ख'

3. निर्देशानुसार वाक्य परिवर्तन कीजिए―
(क) (i) जो अहंकारी होता है, उसे कोई नहीं चाहता है। (सरल)
उत्तर― अहंकारी को कोई नहीं चाहता है।
(ii) ज्योंही प्रिंसिपल को देखा, रामू कक्षा में घुस गया। (संयुक्त)
उत्तर― रामू ने प्रिंसिपल को देखा और वह कक्षा में घुस गया।
(ख) रचना की दृष्टि से वाक्य का भेद लिखिए― अहो! कितना सुंदर दृश्य।
उत्तर― सरल (विश्मय बोधक)

4. (क) निर्देशानुसार वाच्य-परिवर्तन कीजिए―
(i) मोहन रोज रामायण पढ़ता है। (कर्मवाच्य)
उत्तर― रामायण मोहन के द्वारा रोज पढ़ी जाती है।
(ii) राधा खूब नाची। (भाववाच्य)
उत्तर― राधा से खूब नाच हुआ।
(ख) वाच्य बतलाइए―
(i) अध्यापक पाठ पढ़ा रहा है।
उत्तर― कर्तृवाच्य
(ii) रामायण पढ़ी जा रही है।
उत्तर― कर्मवाच्य

5. रेखांकित पदों का पद-परिचय दीजिए―
(क) राधा बहुत मधुर गाती है।
उत्तर― विशेषण
(ख) तुम प्रातःकाल सैर किया करो। उत्तर― संज्ञा

6. (क) हास्य रस का स्थाई भाव लिखिए।
उत्तर― हास्य रस का स्थाई भाव हास है।
(ख) उत्साह नामक स्थाई भाव से कौन-सा रस निष्पन्न होता है।
उत्तर― वीर रस
(ग) निम्नलिखित काव्यांश में कौन-सा रस है?
बाल दसा मुख निरखि जसोदा पुनि-पुनि नंद बुलावति।
अंचरा तर तैं ढाँकि सूर के प्रभु को दूध पियावति।।
उत्तर― वात्सल्य रस

खण्ड 'ग'

7. निम्न गद्यांश को पढ़कर संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए―
'शिक्षा' बहुत व्यापक शब्द है। उसमें सीखने योग्य अनेक विषयों का समावेश हो सकता है। पढ़ना-लिखना भी उसी के अंतर्गत है। इस देश की वर्तमान शिक्षा-प्रणाली अच्छी नहीं। इस कारण यदि कोई स्त्रियों को पढ़ाना अनर्थकारी समझे तो उसे उस प्रणाली का संशोधन करना या कराना चाहिए, खुद पढ़ने-लिखने का दोष नहीं देना चाहिए। लड़कों ही की शिक्षा-प्रणाली कौन-सी बड़ी अच्छी है। प्रणाली बुरी होने के कारण क्या किसी ने यह राय दी है कि सारे स्कूल और कॉलिज बंद कर दिए जाएँ? आप खुशी से लड़कियों और स्त्रियों की शिक्षा की प्रणाली का संशोधन कीजिए। उन्हें क्या पढ़ाना चाहिए, कितना पढ़ाना चाहिए, किस तरह की शिक्षा देनी चाहिए, और कहाँ पर देना चाहिए घर में या स्कूल में इन सब बातों पर बहस कीजिए, विचार कीजिए, जी में आवे सो कीजिए, पर परमेश्वर के लिए यह न कहिए कि स्वयं पढ़ने-लिखने में कोई दोष है-वह अनर्थकर है, वह अभिमान का उत्पादक है, वह गृह-सुख का नाश करने वाला है। ऐसा कहना सोलहों आने मिथ्या है।

प्रश्न-

(i) पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर― पाठ का नाम― स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन
लेखक का नाम ― महावीर प्रसाद द्विवेदी

(ii) शिक्षा की व्यापकता से क्या आशय है?
उत्तर― शिक्षा की व्यापकता से आशय व्यक्ति को चाहे स्त्री हो या पुरुष सभी को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की प्रेरणा, शिक्षा मिले। जिससे जीवन मूल्य निर्मित हो सके। शिक्षा का आशय केवल पढ़ना लिखना ही नहीं होना चाहिए बल्कि समग्र जीवन के उत्थान हेतु अनुभव प्रदान करने वाली होनी चाहिए।

(iii) लेखक ने पाठकों से क्या निवेदन किया है?
उत्तर― लेखक ने लड़कियों और स्त्रियों की शिक्षा की प्रणाली का संशोधन करने हेतु उन्हें क्या पढ़ाना चाहिए, कितना पढ़ाना चाहिए, किस तरह की शिक्षा देनी चाहिए, और कहाँ पर देना चाहिए घर में या स्कूल में इन सब बातों पर विचार करने का निवेदन किया है।

(iv) किस बात को झूठ कहा गया है?
उत्तर― स्वयं पढ़ने-लिखने में कोई दोष है, वह अनर्थकर है, वह अभिमान का उत्पादक है, वह गृह-सुख का नाश करने वाला है। बात को झूठ कहा गया है।

(v) गद्यांश का मूल आशय स्पष्ट कीजिए?
उत्तर― इस गद्यांश का मूल आशय स्त्री शिक्षा के विरोधियों के कुतर्कों का खंडन करते हुए 'स्त्री शिक्षा' का समर्थन किया गया है। शिक्षा प्रणाली कैसी हो इस पर विवरण दिया गया है।

अथवा

अब हालदार साहब को बात कुछ-कुछ समझ में आई। एक चश्मेवाला है जिसका नाम कैप्टन है। उसे नेताजी की बगैर चश्मेवाली मूर्ति बुरी लगती है। बल्कि आहत करती है, मानो चश्मे के बगैर नेताजी को असुविधा हो रही हो। इसलिए वह अपनी छोटी-सी दुकान में उपलब्ध गिने-चुने फ्रेमों में से एक नेताजी की मूर्ति पर फिट कर देता है। लेकिन जब कोई ग्राहक आता है और उसे वैसे ही फ्रेम की दरकार होती है जैसा मूर्ति पर लगा है तो कैप्टन चश्मेवाला मूर्ति पर लगा फ्रेम-संभवतः नेताजी से क्षमा माँगते हुए-लाकर ग्राहक को दे देता है और बाद में नेताजी को दूसरा फ्रेम लौटा देता है। वाह ! भई खूब! क्या आइडिया है।

प्रश्न-

(i) 'आहत' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर― दुखी

(ii) 'वाह खूब! क्या आइडिया है'- यह विचार किसके मन में आया?
उत्तर― हालदार साहब के मन में चश्मेवाले कैप्टन के विषय में सुनकर 'वाह खूब! क्या आइडिया है' यह विचार मन में आया।

(iii) हालदार साहब को पहले कौन-सी बात समझ में नहीं आती थी?
उत्तर― हालदार को पहले यह बात समझ में नहीं आती थी कि मूर्ति पर चश्मा कौन लगा जाता है और क्यों?

(iv) चश्मावाला नेताजी की मूर्ति पर चश्मा क्यों लगा देता है?
उत्तर― चश्मेवाला नेताजी का भक्त होने के कारण बिक्री के चश्मों में से एक चश्मा लगा देता था। क्योंकि उसे नेताजी की बिना चश्मे की मूर्ति देखकर दुःख पहुँचता था।

(v) चश्मेवाले को नेताजी की बगैर चश्मेवाली मूर्ति बुरी क्यों लगती है?
उत्तर― चश्मेवाला नेताजी का भक्त होने के कारण बिक्री के चश्मों में से एक चश्मा लगा देता था। क्योंकि उसे नेताजी की बिना चश्मे की मूर्ति देखकर दुःख पहुँचता था।

8. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए―
(क) हालदार साहब की आँखें क्यों भर आईं?
उत्तर― हालदार साहब को सुभाष चन्द बोस बहुत प्रिय थे। उनके मन में सुभाषचन्द्र बोस के प्रति गहरा सम्मान था। स्वयं हालदार साहब सच्चे देशभक्त थे। इसीलिए हालदार साहब सदा सुभाष की मूर्ति के सामने जीप रुकवाते थे और उन्हें कौतूहल से निहारा करते थे। उन्हें यह देखकर भी अच्छा लगता था कि चलो सुभाष की मूर्ति पर कोई सच्चा देशभक्त चश्मा पहनाने वाला तो है। लेकिन एक दिन जब हालदार साहब सुभाष की मूर्ति के सामने आकर रुके तो देखा कि सुभाष की आँखों पर सरकंडे से बना चश्मा लगा था। भावुक स्वभाव वाले होने के कारण हालदार साहब की आँखों में आँसू भर आए।

(ख) बालगोबिन भगत की संझा से लेखक का क्या तात्पर्य है? वातावरण पर इसका क्या प्रभाव पड़ता था?
उत्तर― 'उनकी संझा' से तात्पर्य है-सायंकाल गाए जाने वाले वे गीत, जिन्हें भगत जी बड़ी तन्मयता के साथ सुर और साज का संगम कर गाया करते थे। इस संझा का प्रभाव यह होता था कि शाम की उमस शीतल प्रतीत होने लगती थी और श्रोतागण शीतलता महसूस करते थे।

(ग) नवाब साहब ने खीरे का स्वाद किस अंदाज से लिया?
उत्तर―नवाब साहब ने खीरे की चमकती फाँकों पर नमक-मिर्च बुरक कर उन्हें प्यासी नजरों से देखा। वे उसका स्वाद और महक की कल्पना में 'वाह' कह बैठे। फिर उसे होठों तक ले गए, फिर सूँघा, स्वाद के कारण उनकी आँखें मुँद गईं। मुँह में पानी भर आया। उस पानी को वे गटक गए और खीरे को खिड़की से बाहर फेंक दिया।

(घ) वे कौन से कारण थे, जिनसे लेखक को ऐसा लगता था कि फादर बुल्के मन से संन्यासी नहीं थे?
उत्तर― फादर बुल्के मन से संन्यासी नहीं थे, ऐसा निम्नलिखित कारणों से लगता है―
(i) फादर अपने संबंधों को भली प्रकार निभाना जानते थे।
(ii) फादर एक बार जो संबंध बना लेते थे, उसे तोड़ते नहीं थे।
(iii) फादर दिल्ली आने पर मौसम के प्रतिकूल होने पर भी लेखक से मिले बिना नहीं जाते थे।

9. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए―
ऊधौ भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए।
अब अपने मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए।
ते क्यों अनीति करें आपुन, जे और अनीति छुड़ाए।
राज धरम तौ यहै 'सूर', जो प्रजा न जाहिं सताए।।

प्रश्न

(क) गोपियाँ किस पर क्या व्यंग्य कर रही हैं?
उत्तर―गोपियाँ कृष्ण के छल पर व्यंग्य कर रही हैं। उन्हें कृष्ण की बजाय योग मार्ग को अपनाना अपने साथ सरासर धोखा जान पड़ता है।

(ख) गोपियों के अनुसार सच्चा राजधर्म क्या है?
उत्तर― गोपियों के अनुसार प्रजा के हित में कार्य करना 'सच्चा राजधर्म' है। अपनी प्रजा के कष्टों का हरण करना एक राजा का कर्त्तव्य है।

(ग) कृष्ण ब्रज से मथुरा जाते समय अपने साथ क्या ले गए थे?
उत्तर― कृष्ण व्रज से मथुरा जाते समय गोपियों का हृदय अपने साथ ले गए थे।

(घ) पाठ और कवि का नाम लिखिए।
उत्तर― पाठ का नाम ― पद
कवि का नाम ― सूरदास

अथवा

छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?
क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता में मौन रहूँ?
सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म-कथा?
अभी समय भी नहीं, थकी रसोई है मेरी मौन व्यथा।

प्रश्न-

(क) कवि अपनी आत्मकथा क्यों नहीं लिखना चाहता, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर― कवि अपनी आत्मकथा नहीं लिखना चाहता है क्योंकि कवि स्वयं को लघु मानता है। वह अपनी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं कहना चाहता।

(ख) 'थकी सोई है मेरी मौन व्यथा' का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर― थकी सोई है मेरी मौन व्यथा' का भावार्थ है― अभी मन की व्यथाएँ शांत हैं, सोई पड़ी हैं।

(ग) कवि अपनी कथा कहने के बजाय क्या करना चाहता है?
उत्तर― कवि अपनी कथा कहने की बजाय औरों की जीवन-कथा सुनना चाहता है।

(घ) आत्मकथा सुनने के संदर्भ में 'अभी समय नहीं है' कवि ऐसा क्यों कहता है?
उत्तर― कवि मानता है कि अभी तक उसने अपने जीवन में ऐसी कोई महानता अर्जित नहीं की है कि जिसके बारे में कुछ गर्वपूर्वक कहा जाए।

(ङ) कवि ने अपनी आत्मकथा को भोली क्यों कहा है?
उत्तर― कवि ने आत्मकथा को भोली इसलिए कहा है क्योंकि उसके जीवन में सरलता और भोलापन है।

10. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए―
(क) स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का क्या आशय है?
उत्तर― अब कवि अपनी प्रिया की मधुर यादों के सहारे शेष जीवन व्यतीत करना चाहता है। वह उसे अपने शेष जीवन का सहारा बनाना चाहता है।

(ख) प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद' - इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएँ कि इसमें कौन-सा अलंकार है?
उत्तर―कवि कहना चाहता है कि राधिका की सुंदरता और उज्ज्वलता अपरंपार है। स्वयं चाँद भी उसके सामने इतना तुच्छ और छोटा है कि वह उसकी परछाई-सा है। इसमें व्यतिरेक अलंकार है। व्यतिरेक में उपमान को उपमेय के सामने बहुत हीन और तुच्छ दिखाया जाता है।

(ग) बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है?
उत्तर― बच्चे की मुसकान सरल, निश्छल, भोली और निष्काम होती है। उसमें कोई स्वार्थ नहीं होता। वह सहज-स्वाभाविक होती है। बड़ों की मुसकान कुटिल, अर्थपूर्ण, सोची-समझी, सकाम और सस्वार्थ होती है। वे तभी मुसकराते हैं, जबकि वे सामने वाले में कोई रुचि रखते हों। बड़ों की मुसकान उनके मन की स्वाभाविक गति न होकर लोक व्यवहार का अंग होती है।

(घ) परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुई, उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर― राम की विशेषताएँ-राम स्वभाव से कोमल और विनम्र हैं। उनके मन में बड़ों के प्रति श्रद्धा और आदर है। वे गुरुजनों के सम्मुख झुकना अपना धर्म मानते हैं। वे महा-क्रोधी परशुराम के क्रुद्ध होने पर भी स्वयं को उनका दास कहते हैं। इस प्रकार वे परशुराम को द्रवीभूत कर देते हैं।
लक्ष्मण की विशेषताएँ-लक्ष्मण में वाक्पटुता कूट-कूटकर भरी है। उनका स्वभाव तर्कशील है। वे बुद्धिमान तथा तर्क करने में निपुण हैं। वे प्रत्युत्पन्नमति हैं। वे वीर और क्रोधी स्वभाव के हैं।

11. कवि का स्वयं को 'अतिथि' कहने की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
उत्तर― कवि घुमंतू प्रकृति का व्यक्ति है। लंबे अंतराल के बाद वह अपने घर लौटता है और कुछ दिन विश्राम कर फिर चल देता है। इस कारण ही कवि ने स्वयं को 'अतिथि' कहा है। शिशु का दर्शन भी कवि ने पहली बार ही किया था। इस कारण कवि बच्चे के लिए अतिथि की तरह था। अतः कवि के द्वारा स्वयं को अतिथि कहना सर्वथा उचित है।

अथवा

मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्त्व होता है। परंतु महानगरों में रहने वाले लोग प्रायः 'पड़ोस कल्चर' से वंचित रह जाते हैं। इस बारे में अपना विचार लिखिए।
उत्तर― 'पड़ोस-कल्चर' मनुष्य के जीवन में अहम् भूमिका निभाता है। परस्पर समूह का बोध पड़ोस से ही होता है। सहानुभूति और सहयोग की भावना का उदय पड़ोस से ही होता है। बड़ी-से-बड़ी विपन्नावस्था में मनुष्य धैर्य बनाए रखता है, कोई व्यक्ति अकेले होने का अनुभव नहीं करता है। इसके विपरीत महानगरों की फ्लैट संस्कृति ने लोगों को पड़ोस की संस्कृति से अलग कर दिया है। वह अकेला है, असुरक्षित है। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि फ्लैट में परिवार के साथ रहते हुए भी अपने बंद कमरे तक सीमित हो गया है। व्यस्तता इतनी है कि सामान्य बातें-कुशलता पूछने जैसी परंपरा को भी भूलता जा रहा है। अतः वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि पड़ोस संस्कृति अपेक्षाकृत फ्लैट संस्कृति से अच्छी थी। मनुष्य के सर्वांगीण विकास में पड़ोस की जितनी भूमिका होती है उतनी अन्य किसी की नहीं।

खण्ड 'घ'

12. नीचे दिए गये संकेत बिन्दुओं के आधार पर 200-250 शब्दों में एक निबंच लिखिए―

1. छात्र और अनुशासन-

विचार बिंदु―
• अनुशासन का अर्थ और महत्त्व
• अनुशासन की प्रथम पाठशाला परिवार
• व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के लिए अनुशासन आवश्यक
• अनुशासन एक महत्त्वपूर्ण जीवन-मूल्य।

अनुशासन का अर्थ और महत्त्व ― 'अनुशासन' शब्द का अर्थ है- 'शासन अर्थात् व्यवस्था के अनुसार जीवन-यापन करना।' यदि कोई व्यवस्था निश्चित की गयी है तो उसके अनुसार जोना। यदि व्यवस्था निश्चित नहीं है तो जीवन में कोई नियम-व्यवस्था या क्रम बनाना। अनुशासन जीवन को चुस्त-दुरुस्त बना देता है। इससे कार्यकुशलता बढ़ती है। समय का पूरा-पूरा सदुपयोग होता है।

अनुशासन की प्रथम पाठशाला-परिवार ― अनुशासन का पाठ पहले-पहल परिवार से सीखा जाता है। यदि परिवार में सब कार्य व्यवस्था से किए जाते हैं तो बच्चा भी अनुशासन सीख जाता है। इसलिए मनुष्य को सबसे पहले अपना घर अनुशासित करना चाहिए।

व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के लिए अनुशासन आवश्यक ― अनुशासन न केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए आवश्यक है, अपितु सामाजिक जीवन के लिए भी परम आवश्यक है। व्यक्तिगत जीवन में अनुशासन का अर्थ है-छात्र को हर कार्य समय और व्यवस्था से करने की आदत होनी चाहिए। उसके काम करने के घंटे निश्चित होने चाहिए। दिनचर्या निश्चित होनी चाहिए।
सामाजिक जीवन में अनुशासन होना अनिवार्य है। जैसे-गाड़ियाँ, बसें, विद्यालय, कार्यालय-सभी समय से खुलें, समय से बंद हों। कर्मचारी ठीक समय पर अपने-अपने स्थान पर कार्य के लिए तैयार हों। वहाँ टालमटोल न हो। इसी के साथ छात्र भी सामाजिक कार्यों में यथासमय पहुँचें। वे वहाँ की सारी नियम-व्यवस्था का पालन करें।

अनुशासन एक महत्त्वपूर्ण जीवन-मूल्य ― वास्तव में अनुशासन एक स्वभाव है, एक विद्या है। अनुशासन का लक्ष्य है-जीवन को सुमधुर और सुविधापूर्ण बनाना। अनुशासित व्यक्ति को सुशिक्षित और सभ्य कहा जाता है। वह न केवल स्वच्छता पर ध्यान देता है, बल्कि अपनी बोलचाल और व्यवहार पर भी ध्यान देता है। वह समाज के बीच खलल नहीं डालता, बल्कि व्यवहार की गरिमा बढ़ाता है। इस प्रकार अनुशासन जीवन-मूल्य है, मनुष्य का आदर्श है।

2. कंप्यूटर आज की आवश्यकता

विचार बिंदु―
• वर्तमान युग-कंप्यूटर युग
• कंप्यूटर की उपयोगिता
• स्वचालित गणना प्रणाली
• कार्यालय तथा इंटरनेट में सहायक

वर्तमान युग-कंप्यूटर युग― वर्तमान युग कंप्यूटर-युग है। यदि भारतवर्ष पर नजर दौड़ाकर देखें तो हम पाएँगे कि आज जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर का प्रवेश हो गया है। बैंक, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, डाकखाने, बड़े-बड़े उद्योग, कारखाने, व्यवसाय, हिसाब-किताब, रुपये गिनने की मशीनें तक कंप्यूटरीकृत हो गई हैं। यह कंप्यूटर का प्रारंभिक प्रयोग है। आने वाला समय इसके विस्तृत फैलाव का संकेत दे रहा है।

कंप्यूटर की उपयोगिता― आज मनुष्य-जीवन का जटिल हो गया है। सांसारिक गतिविधियों, परिवहन और संचार उपकरणों आदि का अत्यधिक विस्तार हो गया है। आज व्यक्ति के संपर्क बढ़ रहे हैं, व्यापार बढ़ रहे हैं; गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, आकांक्षाएँ बढ़ रही हैं , साधन बढ़ रहे हैं। परिणामस्वरूप सब जगह भागदौड़ और आपाधापी चल रही है।

स्वचालित गणना-प्रणाली― कंप्यूटर एक ऐसी स्वचालित गणना प्रणाली है, जो कैसी भी अव्यवस्था को व्यवस्था में बदल सकती है। हड़बड़ी में होने वाली मानवीय भूलों के लिए कंप्यूटर रामबाण औषधि है। क्रिकेट के मैदान में अंपायर की निर्णायक भूमिका हो, या लाखों-करोड़ों-अरबों की लंबी-लंबी गणनाएँ, कंप्यूटर पलक झपकते ही आपकी समस्या हल कर सकता है। पहले इन कामों को करने वाले कर्मचारी हड़बड़ाकर काम करते थे। परिणामस्वरूप काम कम, तनाव अधिक होता था। अब कंप्यूटर की सहायता से काफी सुविधा हो गई है।

कार्यालय तथा इंटरनेट में सहायक― कंप्यूटर ने फाइलों की आवश्यकता कम कर दी है। कार्यालय की सारी गतिविधियाँ सीडी रोम, पेन ड्राइव और अब उससे भी आगे तमाम शक्तिशाली हार्डडिस्कों में सुरक्षित रख ली जाती हैं। इसलिए फाइलों के स्टोरों की जरूरत अव नहीं रही। अब समाचार-पत्र भी इंटरनेट के माध्यम से पढ़ने की व्यवस्था हो गई है। विश्व के किसी कोने में छपी पुस्तक, फिल्म, घटना की जानकारी इंटरनेट पर ही उपलब्ध है। एक समय था, जब कहते थे कि विज्ञान ने संसार को कुटुंब बना दिया है। कंप्यूटर ने तो मानो उस कुटुंब को आपके कमरे में उपलब्ध करा दिया है।

13. अपनी योग्यताओं का विवरण देते हुए अपने जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्राथमिक शिक्षक के पद के लिए आवेदन-पत्र लिखिए।

बेसिक शिक्षा अधिकारी
बेसिक जिला शिक्षा केन्द्र,
जबलपुर मध्यप्रदेश।
विषय : प्राथमिक शिक्षक/शिक्षिका हेतु आवेदन-पत्र।
महोदय,
दिनांक 07 दिसम्बर 2023 के दैनिक जागरण समाचार में प्रकाशित विज्ञापन से ज्ञात हुआ कि जिले को प्राथमिक शिक्षकों की आवश्यकता है। प्रार्थिनी भी इस पद के लिए आवेदन-पत्र प्रस्तुत कर रही है जिसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है―
नाम : कांक्षी-प्रवी
पिता का नाम: आर. एफ टेमरे
जन्म-तिथि: 05/05/2023
शैक्षिक योग्यताएँ: X XII बी.एस.ई. 2003 प्रथम श्रेणी 88%
बी.एस सी प्रथम श्रेणी
व्यावसायिक योग्यता : बी.एड प्रथम श्रेणी
अनुभव : अध्यापन अनुभव - 1 वर्ष
आशा है कि मेरी योग्यताओं पर विचार करते हुए आप सेवा का अवसर अवश्य देंगे।
सधन्यवाद।
प्रार्थिनी
कांक्षी-प्रवी
बाजार चौक नीम टोला
MP सिवनी

परीक्षा में कम अंक आने पर असंतुष्ट और दुःखी मित्र को सांत्त्वना पत्र लिखिए।
उत्तर―
बाजार चौक नीम टोला
MP सिवनी
07 दिसम्बर 2023
प्रिय मित्र अमित,
कल ही तुम्हारा पत्र मिला। पत्र पढ़कर बहुत दुख हुआ कि परीक्षा में तुम्हारे अंक कम आए हैं इस कारण आप दुखी हो।
मित्र, हम मित्रों, रिश्तेदारों तथा तुम्हारे सभी सहपाठियों को पता है कि तुम परीक्षा से लगभग डेढ़ माह पूर्व से ही स्कूल नहीं आ सके थे। तुम अपने पिता के इलाज के लिए जगह-जगह भटकते भी रहे और अंत में वे अस्पताल में दस दिन तक भर्ती रहे। उनकी सेवा करते हुए तुमने आज के युवाओं के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। ऐसे में तुम अपर्न पढ़ाई कैसे कर पाते। अतः कम अंक आने पर दुखी होने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है।
मित्र! जीवन में सुख-दुख, सफलता-असफलता, हानि-लाभ तो आते-जाते रहते हैं। आगामी बोर्ड परीक्षा में खूब कड़ी मेहनत करके अच्छे अंक प्राप्त करना ताकि इस परीक्षा का हरजाना पूरा हो सके। मुझे आशा ही नहीं वरन् विश्वास है कि तुम अपने परिश्रम और लगन से सिद्ध कर दोगे कि परिश्रम से हर सफलता प्राप्त की जा सकती है। अंत में, मेरा एक सुझाव है कि तुम्हारे कम अंक होने जैसी बातें भूल कर नए उत्साह, उमंग, लगन एवं परिश्रम के साथ अगली कक्षा की पढ़ाई में जुट जाओ। सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी। अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना। पत्रोत्तर शीघ्र देना।
तुम्हारा अभिन्न मित्र
काव्य प्रवाह

14. आपने एक संगीत सिखाने का संस्थान खोला है। उसके लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर―
खुश खबरी || खुश खबरी || खुश खबरी
ध्यान दें!
→ संगीत में रुचि रखने वाले!
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अब आपकी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए अग्रसर है―
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संपर्क सूत्र―
संचालक, "सरस्वती संगीत ज्ञान"
जबलपुर (मध्यप्रदेश)

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1. 10th हिन्दी (क्षितिज- 2 काव्य-खण्ड) पाठ 1 'पद' (सूरदास, पदों का अर्थ)
2. पाठ 1 'माता का अँचल' (हिन्दी सहायक वाचन - कृतिका) सारांश, शिवपूजन सहाय - अभ्यास (प्रश्नोत्तर)
3. पाठ - 7 'नेताजी का चश्मा' पाठ व सारांश कक्षा - 10 अभ्यास प्रश्नोत्तर रचना अभिव्यक्ति एवं व्याकरण
4. पाठ 8 बालगोविन भगत पाठ का सारांश, प्रश्नोत्तर

कक्षा 9 क्षितिज (हिन्दी) के गद्य खण्ड के पाठ, उनके सारांश एवं अभ्यास
1. पाठ 1 'दो बैलों की कथा' पाठ, का सारांश, अभ्यास एवं व्याकरण
2. सम्पूर्ण कहानी- 'दो बैलों की कथा' - प्रेंमचन्द
3. दो बैलों की कथा (कहानी) प्रेंमचन्द
4. पाठ- 2 'ल्हासा की ओर' - यात्रावृत्त - राहुल सांकृत्यायन
5. पाठ- 2 'ल्हासा की ओर' (यात्रा-वृत्तान्त, लेखक- राहुल सांकृत्यायन), पाठ का सारांश, प्रश्नोत्तर, भाषा अध्ययन, रचना और अभिव्यक्ति (कक्षा 9 हिन्दी)
6. पाठ - 3 'उपभोक्तावाद की संस्कृति' (विषय हिन्दी गद्य-खण्ड कक्षा - 9) प्रश्नोत्तर अभ्यास
7. साँवले सपनों की याद– जाबिर हुसैन, प्रमुख गद्यांश एवं प्रश्नोत्तर।
8. नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया — चपला देवी, Class 9th Hindi क्षितिज पाठ-5 अभ्यास व प्रश्नोत्तर
9. पाठ 6 'प्रेंमचंद के फटे जूते' (विषय- हिन्दी गद्य-खण्ड कक्षा- 9) पाठ का सारांश एवं प्रश्नोत्तर
10. पाठ- 7 'मेरे बचपन के दिन' (विषय- हिन्दी कक्षा- 9 गद्य-खण्ड) सारांश एवं प्रश्नोत्तर

कक्षा 9 क्षितिज (हिन्दी विशिष्ट) के पद्य खण्ड के पाठ, उनके सार, अभ्यास व प्रश्नोत्तर को पढ़ें।
1. पाठ 9 साखियाँ और सबद (पद) भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
2. पाठ 10 'वाख' भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
3. पाठ 11 'सवैये' भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
4. पाठ 12 'कैदी और कोकिला' भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
5. पाठ 13 'ग्रामश्री' भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
6. पाठ 14 चंद्र गहना से लौटती बेर केदारनाथ अग्रवाल भावार्थ एवं अभ्यास
7. पाठ - 15 'मेघ आए' (विषय - हिन्दी काव्य-खण्ड कक्षा- 9) सारांश, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
8. पाठ - 16 'यमराज की दिशा' (विषय - हिन्दी काव्य-खण्ड कक्षा- 9) सारांश, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
9. बच्चे काम पर जा रहे हैं' (पाठ - 17 विषय - हिन्दी काव्य-खण्ड कक्षा- 9) सारांश, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
edudurga.com

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