राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एन सी एफ 2005) के अनुसार यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी. 2020) इक्कीसवीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है। इसका लक्ष्य भारत के विकास के लिए अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्रत्येक नागरिक में निहित रचनात्मक क्षमताओं के विकास पर विशेष बल देती है। यह शिक्षा नीति साक्षरता एवं संख्या ज्ञान जैसी बुनियादी क्षमताओं के विकास के साथ उच्च स्तर की तार्किक और समस्या समाधान संबंधी संज्ञानात्मक क्षमताओं का विकास करने के साथ साथ नैतिक सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर भी व्यक्ति का विकास करना चाहती है।
1. वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की 10वीं बैठक में 2030 सतत् विकास हेतु एजेण्डा तय किया गया था। इसमें कुल 17 विकास लक्ष्य अंगीकृत किये गये थे। जिसमें से एक लक्ष्य समावेशी और न्याय संगत, गुणवन्तायुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही सभी को सीखने का अवसर प्रदान करना है। इस लक्ष्य को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा प्राप्त करने का प्रयास किया गया है।
2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की घोषणा भारत सरकार के द्वारा 29 जुलाई 2020 को किया गया है। भारत की शिक्षा नीति में 1986 में जारी शिक्षा नीति से 34 वर्ष बाद यह पहला नवीन परिवर्तन किया गया है। अन्तरिक्ष वैज्ञानिक के कस्तूरी रंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 आधारित है।
शिक्षा व्यवस्था में किये जा रहे बुनियादी बदलावों के केन्द्र में शिक्षक अवश्य ही होने चाहिए। शिक्षक ही नागरिकों एवं अगली पीढ़ी को सही मायने में आकार देते हैं। अतः नई शिक्षा नीति को निश्चित तौर पर हर स्तर पर शिक्षकों को समाज में सम्माननीय एवं अनिवार्य सदस्य के रूप में पुनः स्थापित करना होगा। इस नीति के द्वारा हर समय कदम उठाकर शिक्षकों को सक्षम बनाना है जिससे ये अपना कार्य प्रभावी ढंग से कर सकें। नई शिक्षा नीति को शिक्षण के पेशे में सबसे होनहार लोगों के चयन में सहायता करनी होगी। इसके लिए उनकी आजीविका सम्मान मान-मर्यादा और स्वायत्तता सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही शिक्षा विभाग में गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही की बुनियादी प्रक्रियायें भी स्थापित करनी होगी।
बच्चों के मस्तिष्क का 85 प्रतिशत विकास 6 वर्ष की अवस्था से पूर्व ही हो जाता है। बच्चों के मस्तिष्क के उचित विकास और शारीरिक वृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए उसके आरंभिक 6 वर्षों को महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान समय में विशेष रूप से सामाजिक आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के करोड़ों बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा उपलब्ध नहीं है। इसलिए ईसीसीई में निवेश करने से इसकी पहुँच देश के सभी बच्चों तक हो सकती है। जिससे सभी बच्चों को शैक्षिक प्रणाली में भाग लेने और तरक्की करने के सभान अवसर मिल सकेंगे। ईसीसीई संभवतया समता स्थापित करने में सबसे शक्तिशाली माध्यम हो सकता है। प्रारम्भिक बाल्यावस्था विकास देखभाल के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के सार्वभौमिक प्रावधान को जल्द से जल्द निश्चय ही वर्ष 2030 से पूर्व उपलब्ध किया जाना चाहिए। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पहली कक्षा में प्रवेश पाने वाले सभी बच्चे स्कूली शिक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हो।
अध्यापक शिक्षा की भूमिका शिक्षकों की एक टीम के निर्माण में महत्वपूर्ण है। यही शिक्षकों की टीम अगली पीढी को आकार देती है। शिक्षकों को तैयार करना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके लिए बहु विषयक दृष्टिकोण और ज्ञान की आवश्यकता के साथ ही साथ बेहतरीन मेंटरों के निर्देशन में मान्यताओं और मूल्यों के निर्माण के साथ ही साथ उनके अभ्यास की भी आवश्यकता होती है।
यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अध्यापक शिक्षा और शिक्षण प्रक्रियाओं से संबंधित अद्यतन प्रगति के साथ ही साथ भारतीय मूल्यों भाषाओं ज्ञान लोकाचार और परम्पराओं या प्रति भी जागरूक रहें। साथ ही एक शिक्षक को इसलिए भी नई शिक्षा नीति के बारे में जानना आवश्यक हो जाता है क्योंकि जब यह नीति धरातल पर उतरेगी तब शिक्षा की व्यवस्था में व्यापक ढाँचागत बदलाव होंगे। प्रमुख रूप से पूर्व बाल्यावस्था को शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा की शिक्षण की मुख्य धारा से जोडा गया है।
1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विजन भारतीय मूल्यों से विकसित शिक्षा प्रणाली है जो सभी को उच्चतर गुणयत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराकर भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाकर एक जीवंत और न्याय संगत ज्ञान समाज में बदलने के लिए प्रत्यक्ष रूप से योगदान करेगी।
2. शिक्षा नीति में परिकल्पित है कि हमारे सस्थानों की पाठ्यचर्या और शिक्षा विधि के माध्यम से छात्रों में अपने मौलिक दायित्वों, संवैधानिक मूल्यों देश के साथ जुड़ाव और बदलते विश्व में नागरिक की भूमिका और उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करे।
3. नीति का विजन है कि छात्रों में भारतीय होने का गर्व न केवल विचार में बल्कि व्यवहार बुद्धि और कार्यों में भी हो। साथ ही ज्ञान कौशल, मूल्यों और सोच में भी होना चाहिए जो मानवाधिकारों स्थायी विकास और जीवन-यापन तथा वैश्विक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हो ताकि वे सही मायने में वैश्विक नागरिक बन सके।
1. साक्षरता और संख्याज्ञान को सर्वाधिक प्राथमिकता देना जिससे सभी छात्र कक्षा के ज्ञान और सीखने के मूलभूत कौशलों को हासिल कर सके।
2. छात्र की विशिष्ट क्षनताओं की स्वीकृति पहचान और उसके विकास हेतु प्रयास करना एवं शिक्षकों को इन क्षमताओं के प्रति संवेदनशील बनाना जिससे वे छात्र की अकादमिक और अन्य क्षमताओं के विकास पर भी पूरा ध्यान दे सके।
3. लचीलापन, जिससे छात्रों में उनके सीखने के तौर तरीके और कार्यक्रमों को चुनने की क्षमता हो। इस तरह अपनी प्रतिभा और रूचियों के अनुसार जीवन में अपना रास्ता चुन सकें।
4. कला और विज्ञान के बीच पाठ्यक्रम और पाठ्येत्तर गतिविधियों के बीच, व्यावसायिक और शैक्षणिक धाराओं आदि के बीच कोई स्पष्ट अलगाव न हो।
5. सामाजिक विज्ञान कला मानविकी और खेल के बीच एक बहु विषयक और समग्र शिक्षा का विकास हो।
6. अवधारणात्मक समझ पर जोर दिया जाय न कि रटंत पद्धति पर और केवल परीक्षा के लिए पढ़ाई।
7. रचनात्मक और तार्किक सोच, तार्किक निर्णय लेने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए।
8. बहुभाषिकता पर जोर।
9. नैतिकता, मानवीय एवं संवैधानिक मूल्यों जैसे सहानुभूति, सम्मान, स्वच्छता, शिष्टाचार, लोकतान्त्रिक भावना, सेवा भावना, सार्वजनिक सम्पत्ति का सम्मान, वैज्ञानिक चिन्तन, जिम्मेदारी स्वतन्त्रता, बहुलतावाद, समानता और न्याय आदि।
10. जीवन कौशल के विकास पर केन्द्रित। जैसे आपसी 'संवाद सहयोग, सामूहिक कार्य लचीलापन।
11. सीखने के लिए सतत् मूल्यांकन पर जोर।
12. तकनीकी का यथासम्भव उपयोग पर बल।
13. सभी पाठ्यक्रम शिक्षण शास्त्र और नीति में स्थानीय संदर्भ की विविधता और स्थानीय परिवेश के लिए एक समान।
14. पूर्ण समता और समावेशन जिससे समस्त छात्र शिक्षा प्रणाली में सफलता प्राप्त कर सके।
15. उत्कृष्ट स्तर का शोध-शैक्षिक विशेषज्ञों द्वारा निरंतर अनुसंधान और नियमित मूल्यांकन के आधार प्रगति की समीक्षा।
16. भारतीय जड़ों व गौरव से बँधे रहना― जहाँ प्रासंगिकता लगे वहाँ भारत की समृद्ध और विविध प्रणालियों और की शामिल करना और उससे प्रेरणा पाना।
1. विज्ञान और गणित के अलावा बुनियादी शिक्षा शिल्प, मानविकी, खेल और फिटनेस, भाषाओं, साहित्य, संस्कृति और मूल्य शामिल हो। शिक्षा से छात्रों में चरित्र निर्माण होता हो।
2. छात्रों में नैतिकता, तार्किकता, करूणा और संवेदन शीलता विकसित करने के गुण हो और रोजगार के लिए सक्षम बनाती हो। 3. 2040 तक भारत में ऐसी शिक्षा प्रणाली होगी जो समाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले छात्रों को समान रूप से सर्वोच्च गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध कराती हो। 4. शिक्षा साक्षरता और संख्या ज्ञान जैसी बुनियादी क्षमताओं के साथ-साथ उच्चतर स्तर की तार्किक और समस्या समाधान संबधी संज्ञानात्मक क्षमता विकास के साथ नाथ नैतिक सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर भी व्यक्ति का विकास करती हो। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार स्कूलों में कक्षा के वातावरण और संस्कृतियों आमूल-चूल परिवर्तन करने का प्राथमिक लक्ष्य है। शिक्षकों की क्षमताओं को अधिकतम स्तर तक बढ़ाना होगा ताकि वे अपना काम प्रभावी ढंग से कर सकें। यह सुनिश्चित हो सके कि वे शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, प्रधानाध्यापकों और अन्य सहायक कर्मचारियों के एक समावेशी समुदाय का हिस्सा बन सके। जिसका रणमूहिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होगा कि विद्यार्थी सीख रहे है। अतः यह स्पष्ट है कि शिक्षा में सशक्तिकरण के लिए उच्चतम गुणवत्ता के साथ शिक्षकों का क्षमता वर्धन एक्त महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। शिक्षकों के सतत् व्यवसायिक विकास एवं क्षमतावर्धन में प्रशिक्षण एक अभिन्न अंग है। "पी एम श्री स्कूल" भारत सरकार द्वारा एक केन्द्र प्रायोजित योजना है। इस पहल का उद्देश्य 14500 से अधिक "पी एम श्री स्कूलों" में विकसित करना है। जिसका संचालन केन्द्र सरकार/राज्य/ केंन्द्र शासित प्रदेश / स्थानीय निकाय द्वारा किया जाना है। साथ ही इस योजना के तहत केन्द्रीय विद्यालय संगठन KVS एवं नवोदय विद्यालय समिति NVS को सामिल किया जायेगा। 1. प्रत्येक छात्र / विद्यार्थी महसूस करें कि विद्यालय में उसका स्वागत एवं उसकी परवाह की गयी है। ये विद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन को प्रदर्शित करने में मदद करेंगे और समय के साथ एक उदाहरणात्मक स्कूलों के रूप में उभरेंगे। यह छात्रों को इस तरह से शिक्षा देंगे जिससे वे एनईपी 2020 की परिकल्पना के अनुसार एक समतापूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण के लिए नागरिकों को तैयार कर सके। यह योजना स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता के विभिन्न आयामों की समझ को बढ़ावा देगी और नीति अभ्यास और क्रियान्वयन की जानकारी देगी। इन स्कूलों की शिक्षा को देश के अन्य स्कूलों तक बढ़ाया जायेगा। जानकारी का स्रोत ― स्कूल शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश द्वारा जारी प्राथमिक / माध्यमिक शिक्षकों के लिए मार्गदर्शिका― हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान। (शिक्षक व्यावसायिक उन्नयन मार्गदर्शिका की पीपीटी।) इस 👇 बारे में भी जानें। इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें। इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें। इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें। इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें। इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें। इस 👇 बारे में भी जानें। इस 👇 बारे में भी जानें। इन गणित के प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं "पी एम श्री स्कूल"
इन विद्यालयों की कुछ विशेषताएँ इस प्रकार रहेगी
2. एक सुरक्षित और प्रेरक शिक्षा का वातावरण मौजूद है।
3. सीखने के अनुभवों की एक विस्तृत श्रृंखला के अवसर उपलब्ध है।
4. अच्छी नौतिक संरचना और सीखने के लिए उपयुक्त संसाधन उपलब्ध हैं।
FLN कक्षाओं का कोर्स दिसंबर तक कितना हो जाना चाहिए?
1. 6500 से 10500 वेतनमान वाले कर्मचारी राजपत्रित अधिकारी हैं।
2. नियुक्ति – गलत जानकारी देकर नियुक्ति पाना, नियुक्ति में प्राथमिकता
3. वरिष्ठता निर्धारण नियम
4. अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन (कक्षा 5 व 8) सत्र 2023-24 हेतु दिशा-निर्देश एवं महत्वपूर्ण जानकारी
5. ब्लूप्रिंट के आधार पर तैयार मासिक मूल्यांकन टेस्ट माह अगस्त 2023
6. अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन वर्ष 2023-24 कक्षा 1 से 4 एवं 6 से 7 हेतु RSK के दिशा-निर्देश व टाइम टेबल
1. जन शिक्षक के कार्य एवं उत्तरदायित्व
2. कर्मचारियों/शिक्षकों के सेवा काल की प्रमुख तिथियाँ
3. मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम, 2017" के नियम किन कर्मचारियों पर लागू नहीं होते।
4. मप्र राज्य कर्मचारी गृहभाड़ा भत्ते की दरें।
5. शासकीय पत्रों एवं राजकाज में प्रयुक्त कठिन पारिभाषिक शब्दों के अर्थ
6. शिक्षा सत्र 2022 23 की गतिविधियां आर. एस. के. निर्देश
7. जानिए आपके जिले की शिक्षा के क्षेत्र में क्या है रैंकिंग
8. शिक्षकों की वरिष्ठता कब प्रभावित होती है
9. कर्मचारियों के लिए आदर्श आचरण संहिता के मुख्य बिंदु।
10. Date of birth (जन्मतिथि) अंग्रेजी शब्दों में कैसे लिखें।
11. विद्यालय Udise कैसे भरें
12. शासकीय कर्मचारियों को अनुकंपा नियुक्ति के अलावा मिलने वाली सुविधाएँ।
13. अशासकीय विद्यालय में क्रीड़ा शुल्क केवल 40% भाग रहेगा- निर्देश
14. मध्य प्रदेश योग आयोग का गठन
1. विभागीय जाँच निलम्बन एवं निलम्बन से बहाली प्रक्रिया
2. मोटर कारों पर तिरंगा फहराने का विशेषाधिकार किन्हें है?
3. समयमान वेतन एवं क्रमोन्नत वेतनमान
4. न्यू पेंशन स्कीम नियमावली।
5. पेंशन से आशय।
6. अवकाश के प्रकार एवं अवकाश हेतु पात्रता।
1. नियुक्ति में प्राथमिकता एवं आयु सीमा में छूट
2. विद्यालयों में शिक्षक छात्र अनुपात
3. कर्मचारियों हेतु गृह भाड़ा भत्ता से संबंधित संपूर्ण जानकारी।
4. एकीकृत शाला निधि (Composite school grant) वर्ष 2022-23
5. एण्डलाइन टेस्ट 2022_23 महत्वपूर्ण बिंदु।
6. अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्रता एवं अपात्रता
1. स्थानान्तरण नीति 2022
2. ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम से लगेगी हाजिरी
3. हाथ धुलाई दिवस- हाथ धोने के प्रमुख स्टेप्स
4. अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षा 2022 23 का स्वरूप - महत्त्व बिंदु
5. 5th 8th परीक्षा पंजीकरण संशोधित तिथियाँ
6. प्राथमिक शिक्षक वरिष्ठता सूची 2023-24
7. शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की प्रमुख धाराएँ
8. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 आधारभूत सिद्धांत एवं विजन
1. लर्निंग आउटकम्स मैपिंग कैसे करें
2. लर्निंग आउटकम मैपिंग का प्रारूप - कक्षा 1 से 8 तक निर्धारित आउटकम्स
3. गणित के लर्निंग आउटकम्स मैपिंग के लिए क्या-क्या करें
4. पर्यावरण विषय के 13 लर्निंग आउटकम्स किन पाठों से मैप करें
5. गणित के सभी लर्निंग आउटकम्स की पाठों से मैपिंग
6. हिन्दी के सभी लर्निंग आउटकम्स की मैपिंग
1. smc सदस्य संख्या एवं उनका अनुपात
2. smc गठन हेतु वंचित एवं कमजोर वर्ग के परिवार
3. smc गठन हेतु पालकों को आमंत्रण सह सूचना कैसे भेंजें
4. एसएमसी गठन की तिथियाँ चेंज
5. SMC गठन में भरे जाने वाले प्रपत्र की जानकारी
1. संख्याओं के प्रकार- प्राकृत, पूर्ण, पूर्णांक, परिमेय
2. भिन्न की समझ
3. विमा या आयाम क्या है? द्विविमीय या द्विआयामी एवं त्रिविमीय या त्रिआयामी वस्तुओं की अवधारणा
4. शून्य का गुणा, शून्यान्त संख्याओं का गुणा, गुण्य, गुणक एवं गुणनफल
5. भाग संक्रिया- भाग के घटक- भाज्य भाजक भागफल और शेष
6. गणित आधारित जादुई पहेलियाँ (पैटर्न)
7. प्रतिशत से प्राप्तांक एवं प्राप्तांकों से प्रतिशत निकालने का सूत्र कैसे बना?
8. टैनग्राम क्या है? इसका आविष्कार एवं विकास
9. गणित- ऐकिक नियम क्या है?
आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope the above information will be useful and important. )
Thank you.
R. F. Tembhre
(Teacher)
edudurga.com
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