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पाठ 1 'पादपों में पोषण' (ऐटग्रेड अभ्यास पुस्तिका) कक्षा - 7 विषय - विज्ञान || Lesson 1 'Padapo me Poshan' At grade Practice book

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अति लघुउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. पोषण किसे कहते हैं? भोजन के प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।
उत्तर– सजीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने एवं इसके उपयोग की विधि को 'पोषण' कहते हैं। पोषण की वह विधि, जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं, 'स्वपोषण' कहलाती है। अतः ऐसे पादपों को 'स्वपोषी' कहते हैं। जन्तु एवं अधिकतर अन्य जीव पादपों द्वारा संश्लेषित भोजन ग्रहण करते हैं। उन्हें 'विषमपोषी' कहते हैं। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज पदार्थ आदि भोजन के घटक हैं।

प्रश्न 2. पौधे के किस भाग को, पौधे की खाद्य फैक्ट्रियाँ कहा जाता है एवं क्यों?
उत्तर– पौधे की पत्तियों को, पौधे की खाद्य फैक्ट्रियाँ कहा जाता है, क्योंकि पादपों में खाद्य पदार्थों का संश्लेषण उनकी पत्तियों में होता है। मृदा में उपस्थित जल एवं खनिज जड़ (मूल) द्वारा अवशोषित किए जाते हैं तथा तने के माध्यम से पत्तियों तक पहुँचाए जाते हैं।

प्रश्न 3. मरुस्थलीय पादपों में पत्तियाँ शल्क और शूल रूपी हो जाती हैं क्यों?
उत्तर– मरुस्थलीय पादपों में वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल क्षय को कम करने के लिए पत्तियाँ शल्क अथवा शूल रूपी हो जाती हैं। इन पादपों के तने हरे होते हैं, जो प्रकाश संश्लेषण का कार्य करते हैं।

प्रश्न 4. जड़ द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज पत्ती तक किस प्रकार पहुँचते हैं?
उत्तर– मृदा में उपस्थित जल एवं खनिज जड़ (मूल) द्वारा अवशोषित किए जाते हैं तथा तने के माध्यम से पत्तियों तक पहुँचाए जाते हैं।

लघुउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5. स्वपोषी तथा विषम पोषी को वर्गीकृत कीजिए?
उत्तर– पोषण की वह विधि, जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं, 'स्वपोषण' कहलाती है। अतः ऐसे पादपों को 'स्वपोषी' कहते हैं। जन्तु एवं अधिकतर अन्य जीव पादपों द्वारा संश्लेषित भोजन ग्रहण करते हैं। उन्हें 'विषमपोषी' कहते हैं। मनुष्य, पशु, पक्षी आदि विषमपोषी जीव हैं। मनुष्य एवं अन्य प्राणियों की तरह कुछ पादप भी अपने पोषण के लिए अन्य पादपों द्वारा निर्मित खाद्य पर निर्भर होते हैं। वे 'विषमपोषी प्रणाली' का उपयोग करते हैं। अमरबेल आदि इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 6. पादपों में सहजीवी सम्बन्ध को उदाहरण सहित समझाइए?
उत्तर– कुछ जीव एक-दूसरे के साथ रहते हैं तथा अपना आवास एवं पोषक तत्त्व एक-दूसरे के साथ बाँटते हैं। इसे सहजीवी सम्बन्ध कहते हैं। उदाहरणत: कुछ कवक वृक्षों की जड़ों में रहते हैं। वृक्ष कवक को पोषण प्रदान करते हैं, बदले में उन्हें जल एवं पोषकों के अवशोषण, में सहायता मिलती है। वृक्ष के लिए इस सम्बन्ध का विशेष महत्व है।
लाइकेन कहे जाने वाले कुछ जीवों में दो भागीदार होते हैं। इनमें से एक शैवाल होता है तथा दूसरा कवक। शैवाल में क्लोरोफिल उपस्थित होता है, जबकि कवक में क्लोरोफिल नहीं होता। कवक शैवाल को रहने का स्थान (आवास), जल एवं पोषक तत्व उपलब्ध कराता है तथा बदले में शैवाल प्रकाश संश्लेषण द्वारा संश्लेषित खाद्य कवक को देता है।

प्रश्न 7. परजीवी एवं मृतजीवी को उदाहरण सहित बताइए?
उत्तर– परजीवी– वे पादप जो अपने भोजन के लिए अन्य पादपों पर निर्भर रहते हैं, परजीवी कहलाते हैं। अमरबेल इसका एक उदाहरण है। अमरबेल में क्लोरोफिल नहीं होता है। ये अपना भोजन उस पादप से प्राप्त करते हैं, जिस पर ये आरोहित होते हैं। जिस पर ये आरोहित होते हैं, वह पादप परपोषी कहलाता है। क्योंकि अमरबेल जैसे पादप परपोषी को अमूल्य पोषकों से वंचित करते हैं, अतः इन्हें परजीवी कहते हैं।
मृतजीवी– वह पोषण प्रणाली जिसमें जीव किसी मृत एवं विघटित जैविक पदार्थों से पोषक तत्त्व प्राप्त करते हैं, मृतजीवी पोषण कहलाती है। मृतजीवी पोषण प्रणाली का उपयोग करने वाले पौधे मृतजीवी कहलाते हैं। कवक (फंजाई) इसका उदाहरण है। कवक आचार, चमड़े, कपड़े एवं अन्य पदार्थों पर उगते हैं। ये उन स्थानों में भी उगते हैं, जो नम एवं उष्ण हों। कवकों की वृद्धि के लिए वर्षा ऋतु सबसे अच्छी परिस्थितियाँ प्रदान करती है। इसी से कारण वर्षा ऋतु के दौरान अनेक वस्तुएँ कवकों की वृद्धि के कारण नष्ट अथवा अनुपयोगी हो जाती हैं।

प्रश्न 8. कीटभक्षी पादप भोजन का भक्षण किस प्रकार करते हैं? सचित्र समझाइए।
उत्तर– कुछ ऐसे पादप भी हैं, जो कीटों को पकड़ते हैं तथा उन्हें पचा जाते हैं। ऐसे पौधे हरे या अन्य किसी रंग के हो सकते हैं। इन्हें कीटभक्षी पादप कहा जाता है। घटपर्णी (पिचर पादप) इसका एक उदाहरण है। घटपर्णी में घड़े के समान संरचना होती है। इसकी घड़े (घट) के समान दिखाई देने वाली संरचना वास्तव में उसकी पत्ती का रूपान्तरित भाग है। पत्ते का शीर्ष भाग घड़े का ढक्कन बनाता है। घड़े के अन्दर अनेक रोम होते हैं, जो नीचे की ओर ढलके रहते हैं अर्थात् अधोमुखी होते हैं। जब कोई कीट घड़े में प्रवेश करता है, तो यह उसके रोमों के बीच फँस जाता है। घड़े में उपस्थित पाचक रस द्वारा कीटों का पाचन हो जाता है। कीटों का भक्षण करने वाले ऐसे पादप कीटभक्षी पादप कहलाते हैं। वीनस फ्लाइ ट्रैप तथा सनड्यू कीटभक्षी पादपों के दो अन्य उदाहरण हैं। घटपर्णी के चित्र के लिए पाठ्य पुस्तक देख सकते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 9. प्रकाश संश्लेषण क्रिया का प्रवाह चित्र बनाइए एवं समीकरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर– पत्तियों में एक हरा वर्णक होता है, जिसे क्लोरोफिल कहते हैं। क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश (सौर प्रकाश) की ऊर्जा का संग्रहण करने में पत्ती की सहायता करता है। इस ऊर्जा का उपयोग जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड से खाद्य संश्लेषण में होता है, क्योंकि खाद्य संश्लेषण सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होता हैं। इसलिए इसे प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। अतः हमने देखा कि क्लोरोफिल, सूर्य का प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल, प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक हैं। इस पृथ्वी पर यह एक अद्वितीय प्रक्रम है। पत्तियों द्वारा सौर ऊर्जा संग्रहित की जाती है तथा पादप में खाद्य के रूप में संचित हो जाती है। अतः सभी जीवों के लिए सूर्य ऊर्जा का चरम स्रोत है। प्रकाश संश्लेषण न होने की स्थिति में खाद्य उपलब्ध नहीं होगा। सभी जीवों का अस्तित्व प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से पादपों द्वारा निर्मित भोजन पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त सभी जीवों के लिए परमावश्यक ऑक्सीजन भी प्रकाश संश्लेषण के दौरान निर्मित होती है। प्रकाश संश्लेषण की अनुपस्थिति में, पृथ्वी पर जीवन की कल्पना असम्भव है।
प्रकाश संश्लेषण के दौरान पत्ती की क्लोरोफिल युक्त कोशिकाएँ, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में, कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल से कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण करती हैं। इस प्रक्रम को निम्न समीकरण द्वारा दर्शा सकते हैं–
कार्बन डाइऑक्साइड + जल →(सूर्य का प्रकाश और क्लोरोफिल)→ कार्बोहाइड्रेट + ऑक्सीजन
इस प्रक्रम में ऑक्सीजन निर्मुक्त होती है। कार्बोहाइड्रेट अन्ततः मण्ड (स्टार्च) में परिवर्तित हो जाते हैं। पत्ती में स्टार्च की उपस्थिति प्रकाश संश्लेषण प्रक्रम का सम्पन्न होना दर्शाता है। स्टार्च भी एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है। प्रकाश संश्लेषण दर्शाने के लिए व्यवस्था चित्र को पाठ्य पुस्तक में देखा जा सकता है।

प्रश्न 10. मृदा में पोषक तत्वों की पुनः पूर्ति किस प्रकार होती है?
उत्तर– पादप मृदा से खनिज पोषक तत्त्व अवशोषित करते हैं। अतः मृदा में इनकी मात्रा लगातार कम होती जाती है। उर्वरक एवं खाद में नाइट्रोजन, पोटेशियम, फॉस्फोरस जैसे पादप पोषक होते हैं। पादपों द्वारा लगातार उपयोग किए जाने के कारण मृदा में उनकी मात्रा धीरे-धीरे कम होती जाती है। इसलिए मृदा को इन पोषक तत्त्वों से समृद्ध करने के लिए भूमि में उर्वरक तथा खाद मिलाने की आवश्यकता होती है। यदि हमें पादप के पोषण की आवश्यकता के बारे में ज्ञान हो, तो हम न केवल पादपों को उगा सकते हैं बल्कि उन्हें स्वस्थ भी रख सकते हैं।
पादपों को प्रोटीन बनाने के लिए सामान्यतः नाइट्रोजन की अधिक आवश्यकता होती है। फसल कटाई के बाद मृदा में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है। यद्यपि वायु में नाइट्रोजन गैस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती है, परन्तु पादप इसका उपयोग उस प्रकार करने में असमर्थ होते हैं, जैसे वे कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं। पौधे नाइट्रोजन को विलेय रूप में ही अवशोषित कर सकते हैं। कुछ जीवाणु जो राइजोबियम कहलाते हैं, वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को विलय पदार्थों में परिवर्तित कर देते है। परन्तु राइजोबियम अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। ये चना, मटर, मूँग, सेम तथा अन्य फलीदार पादपों की जड़ों में रहते हैं तथा उन्हें नाइट्रोजन की आपूर्ति करते हैं। अधिकतर दालें फलीदार पादपों से प्राप्त होती हैं। इसके बदले पादप राइजोबियम जीवाणु को आवास एवं खाद्य प्रदान करते हैं। अतः उनमें सहजीवी सम्बन्ध होता है। इस सम्बन्ध का किसानों के लिए विशेष महत्व है। दालों की फसलों के लिए उन्हें मृदा में नाइट्रोजनी उर्वरक देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यही नहीं दाल की फसल उगाने के बाद अगली फसल के लिए भी सामान्यतः उर्वरकों की आवश्यकता नहीं रहती।

एटग्रेड अभ्यासिका कक्षा 6 हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान, सा. विज्ञान के पाठों को पढ़ें।
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एटग्रेड अभ्यासिका कक्षा 8 हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान, सा. विज्ञान के पाठों को पढ़ें।
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6. English Lesson 1 'Another Chance' सटीक प्रश्नों के उत्तर

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
edudurga.com

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