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घमण्ड, अहंकार, दम्भ, दर्प, गर्व, अभिमान, अहम् एवं अहंमन्यता शब्दों में सूक्ष्म अंतर एवं वाक्य में प्रयोग

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हिन्दी भाषा के शब्द जैसे घमण्ड, अहंकार, दम्भ, दर्प, गर्व, अभिमान, अहम् , अहंमन्यता समानार्थक लगते हैं, किन्तु इन शब्दों में सूक्ष्म अंतर है। नीचे प्रत्येक शब्द का अर्थ एवं वाक्य में प्रयोग दिया गया है।

घमण्ड - सभी स्थितियों में अपने को बड़ा और दूसरे को हीन समझना। अहमन्यता, अभिमान का प्रचंड रुप, सभी स्थितियों में स्वयं को बड़ा, दूसरों को हीन समझने का भाव।
उदाहरण - रावण का भी घमण्ड नहीं रहा तो फिर तुम क्या चीज हो।

अहंकार - मन का गर्व, झूठे अपनेपन का बोध होना।
उदाहरण - 1. सबसे अच्छे अंक प्राप्त होने पर उसे बहुत अहंकार हो गया है।
2. उसे अपनी राजनीतिक पहुँच का अहंकार हो गया है।

दम्भ - किसी प्रकार की न योग्यता होते हुए भी बड़ा समझना।
उदाहरण - मनुष्य में दम्भ नहीं होना चाहिए।

दर्प – नियम के विरुद्ध काम करने पर भी घमंड करना।
उदाहरण - लड़के को अपने पिता का विधायक होने का दर्प है।

गर्व - किसी तरह का अच्छा कार्य होने पर ऊँचा होने की भावना या विद्या, धन आदि के कारण बड़ा समझने का भाव गर्व होता है।
उदाहरण - हमें अपने देश पर गर्व है।

अभिमान - प्रतिष्ठा में अपने को बड़ा और दूसरे को छोटा समझना।
उदाहरण - सभी के सामने अकड़ कर चलता है, पता नहीं उसे किस बात का अभिमान है।

अहम् - हम भी कुछ है यह प्रदर्शित किया जाता है।
उदाहरण - आजकल वह सीधे मुँह बात नहीं करता, पता नहीं उसे किस बात का अहम् है।

अहंमन्यता - अंह का प्रदर्शन, अहंकार का प्रचंड रूप।
उदाहरण - उसे उसकी ही अहंमन्यता ले डूबेगी।

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I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
edudurga.com

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