वर्तमान में प्रत्येक अभिभावक चाहता है कि उनके बच्चे खूब पढ़ाई करें और आगे बढ़े। किन्तु अक्सर देखा जाता है कि बच्चे पढ़ाई को छोड़कर अन्य कार्यों जैसे मोबाइल गेम, निर्उद्देश्य घूमना, साथियों के साथ आवारागर्दी आदि में ज्यादा ध्यान देते हैं। ऐसी स्थिति में पालकों को क्या करना चाहिए इस बारे में नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं। जिन पर अमल करते हुए बच्चों में पढ़ाई की आदत विकसित की जा सकती है।
1. अभिभावकों के लिए बच्चों से ज्यादा महत्वपूर्ण पढ़ने कुछ नहीं है अतः सायं 08:00 बजे तक टीवी बंद कर देना चाहिए।
2. प्रति दिवस अपने बच्चों की स्कूल डायरी देखने के लिए 30-45 मिनट निकालना होगा साथ ही उनके गृहकार्य पर ध्यान देना चाहिए।
3. समय-समय पर बच्चे के सभी विषयों हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान आदि में उनके प्रदर्शन को देखें एवं उन विषयों पर विशेष ध्यान दें, जिनमें वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। उनकी बुनियादी शिक्षा भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
4. बच्चे के विश्राम की आदतों को डेवलप करना चाहिए। उन्हें रात्री को 10:00 बजे तक सो जाने और सुबह 06:00 बजे उठ जाने को प्रेरित करना चाहिए।
5. यदि अभिभावक किसी समारोह अथवा सामाजिक आयोजन में जाते हैं तो समय पर घर लौट आने का ध्यान रखना चाहिए ताकि बच्चों के अध्ययन अध्यापन की प्रक्रिया में व्यवधान न हो। यदि बच्चों को भी अपने साथ लेकर जाते हैं और देर रात तक लौटते हैं तो अगले दिन बच्चे को आराम करने देना चाहिए विद्यालय में छुट्टी का आवेदन प्रस्तुत कर देना चाहिए।
6. बच्चों को अपने परिवेश एवं पर्यावरण के प्रति सजग करते रहना चाहिए। स्वच्छता के साथ-साथ वृक्षों के महत्व पर समय-समय पर प्रकाश डालते हुए उन्हें पौधारोपण करने हेतु प्रेरित करना चाहिए। वर्तमान में प्लास्टिक हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा है इसके प्रयोग को सीमित करने हेतु प्रेरित करना चाहिए।
7. ग्रीष्म काल या अवकाश के समय बच्चों को ऐसे स्थानों पर भ्रमण के लिए ले जाना चाहिए जिससे बच्चों को कुछ प्रेरणा प्राप्त हो। अलग-अलग अवकाश में अलग-अलग स्थानों पर भ्रमण हेतु ले जाना चाहिए।
8. हर बच्चे में कुछ न कुछ जन्मजात योग्यता होती है उन योग्यताओं का पता लगाकर उन्हें निखारने का प्रयास करना चाहिए जैसे बच्चों के अंदर किसी विषय विशेष, संगीत, खेल, अभिनय, चित्रांकन, नृत्य आदि की योग्यता हो सकती है या फिर भी किसी विशेष क्षेत्र में अपनी रुचि रखते हो तो उन्हें पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना चाहिए ताकि वे उस क्षेत्र में अग्रणी बन सके।
9. बच्चे के खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोजन का बच्चे की मानसिक शक्ति विकसित होने में विशेष योगदान होता है। हो सके तो हर रविवार खाने की कोई ऐसी चीज बनानी चाहिए बच्चों को उन्हें पसंद हो। इन खाने पीने की चीजों को बनाने में उनका सहयोग भी लेना चाहिए ताकि उन्हें अच्छा भी लगे और अपना काम खुद करने की भावना भी विकसित होगी
10. बच्चा जब जन्म लेता है और धीरे-धीरे बड़ा होता है तो अपने आसपास की चीजों को देखकर उसके मन में कई तरह के प्रश्न उठते हैं क्योंकि वह उनके बारे में जानना चाहता है। यदि माता-पिता से वह उस संबंध में प्रश्न करता है तो यथासंभव उसकी समझ के अनुसार उन्हें उत्तर अवश्य देना चाहिए, अनावश्यक क्रोध करना या कथन के उत्तर को डालना नहीं चाहिए। यदि आप उन्हें यथोचित संतुष्ट कर पाने वाला उत्तर देते हैं तो बच्चे की मानसिक शक्ति विकसित होती है। वैसे तो प्रत्येक बच्चा जन्म से वैज्ञानिक होता है, उसके पास ढेरों सवाल होते हैं। मुमकिन है आप जवाब न दे पायें, किंतु जानकारी न होने पर उत्तर पता करने की कोशिश कर उन्हें बताना चाहिए।
11. बच्चे कोरे कागज की तरह होते हैं और यह ऐसा समय है जब उन्हें सही और गलत का ज्ञान अच्छी तरह से कराया जा सकता है विशेष तौर से उन्हें अनुशासन और जीने के बेहतर तरीकों के बारे में समझाना चाहिए।
12. सबसे महत्वपूर्ण है विद्यार्थी का स्कूल। एक अभिभावक को अपने बच्चों को ऐसे विद्यालय में दाखिला दिलाना चाहिए जहाँ के शिक्षक शिक्षा दीक्षा के प्रति समर्पित हो, उनका व्यवहार कुशल हो। विद्यालय में अनियमितता एवं पर्याप्त अनुशासन हो।
13. जब बच्चे कुछ बड़े हो जाए तब उनमें स्वयं पढ़ने की आदत विकसित करना चाहिए। अच्छे साहित्य की व्यवस्था करते हुए प्रेरणादायक प्रसंगों पर प्रकाश डालना चाहिए ताकि वे आनंदित होकर और भी उसी तरह के साहित्य का अध्ययन करने हेतु प्रेरित हों।
14. बच्चों को विशेष तौर से आवश्यकता से अधिक मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने देना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे मोबाइल में किस तरह की चीजें देखते हैं। बच्चों को अच्छी चीजें देखने हेतु प्रेरित करना चाहिए।
15. बच्चों का भावी जीवन सुखद एवं कार्यकुशलता युक्त हो तो इस हेतु उन्हें अपने घर के कामों में सहायता करने हेतु प्रेरित करना चाहिए। कुछ कार्यों को उन्हें स्वयं करने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए। घर में ऐसे बहुत से छोटे-मोटे कार्य जैसे साफ-सफाई, चीजों को व्यवस्थित रखना, पशुओं को चारा खिलाना इत्यादि को बच्चे आसानी से स्वयं कर सकते हैं।
16. मानव की ऐसी महत्वपूर्ण गुण जो विपरीत परिस्थितियों में उनसे उबरने हेतु कार्य आते हैं जिन्हें की बच्चों में विकसित करना आवश्यक है जैसे दृढता, स्वावलंबन, मितव्ययता आदि। इन गुणों का बच्चों के जीवन में समावेश करना।
17. बच्चों मे नियमित ध्यान और व्यायाम करने की आदत डालनी चाहिए। अपने अनुभव के आधार पर अपने बच्चों का जीवन सुंदर और स्वस्थ बनाने में उनकी सहायता करनी चाहिए।
18. बच्चों में शारीरिक योग्यता विकसित करने हेतु खेलकूद व्यायाम इत्यादि हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए।
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'स्रोत भाषा' एवं 'लक्ष्य भाषा' क्या होती है? इनकी आवश्यकता एवं प्रयोग
आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope the above information will be useful and important. )
Thank you.
R. F. Tembhre
(Teacher)
edudurga.com
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